कभी नक्सलियाें का गढ़ रहा जिले में बिहार का सीमावर्ती क्षेत्र में अब पॉवर हब बनता जा रहा है। पंप स्टोरेज (पीएसपी) पर आधारित बिजली परियोजनाओं से इस अति पिछड़े क्षेत्र में विकास को रफ्तार मिलने की उम्मीद तेज हाे गई है।
टिहरी हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन (टीएचडीसी) की 1200 मेगावाट वाली पीएसपी इकाई को मंजूरी मिलने के बाद इस क्षेत्र में स्थापित होने वाली पाॅवर परियोजनाओं की क्षमता करीब 14000 मेगावाट के करीब पहुंच गई है। अभी कई अन्य परियोजनाओं के लिए भी संभावना तलाशी जा रही है।
रिहंद बांध पर आधारित करीब 20000 मेगावाट की तापीय परियोजनाओं के कारण सोनभद्र की पहचान देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में है। अब सरकार पंप स्टोरेज पर आधारित बिजली परियोजनाओं को भी बढ़ावा दे रही है। पिछले डेढ़ साल में विभिन्न कंपनियों की ओर से प्रस्तुत सात पीएसपी इकाइयां लगाने को सरकार मंजूरी दे चुकी हैं।
अब टीएचडीसी के रूप में आठवीं इकाई के लिए भी सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। यह इकाई बसुहारी गांव में सोन नदी पर स्थापित होनी है। पिछले दिनों ही कंपनी के अधिकारियों ने प्रशासन की टीम के साथ प्रस्तावित क्षेत्र का भ्रमण भी किया था।
करीब 6600 करोड़ रुपये की टीएचडीसी की परियोजना से 1200 मेगावाट की बिजली तैयार होनी है। इससे क्षेत्र में रोजगार व विकास के भी नए द्वार खुलेंगे। बसुहारी गांव बिहार सीमा पर स्थित जिले का अति पिछड़ा क्षेत्र रहा है।