कोरोना काल में पंचायत चुनाव होने के कारण संक्रमण फैल गया। सामाजिक दूरी का उल्लंघन, मास्क न लगाने की वजह से लोग कोरोना मरीजों के संपर्क में आने से कई कर्मचारी भी संक्रमित हो गए। जिले में अकेले शिक्षा विभाग में कुल 14 शिक्षक और शिक्षामित्रों ने जान गंवाई। इनके परिवार के सदस्यों को मुआवजा दिलाने के लिए शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी है। इनमें कितने को मुआवजा मिलेगा यह अभी तय नहीं है। अभी तक जिला प्रशासन की ओर से मात्र एक के मुआवजे की स्वीकृति मिलने की सूचना है।
बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने चुनाव के दौरान हुई मौत का जो आंकड़ा बताया उसको लेकर शिक्षकों में रोष है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इसकी निंदा की है और मौत के आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया। शिक्षक संगठन से जुड़े लोग हर जिले में चुनाव के दौरान जान गंवाने वाले शिक्षकों का डाटा तैयार किया है। उनका कहना है कि सरकार को चाहिए कि इस बीच जो भी शिक्षक कोरोना की वजह से अपनी जान गंवाए हैं उनको मुआवजा और उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे। शिक्षक संगठन अटेवा ने चुनाव के दौरान जान गंवाने वाले कुल 16 शिक्षक और शिक्षामित्रों की सूची तैयार की है। अटेवा के जिलाध्यक्ष राजकुमार मौर्या ने कहा कि सरकार वास्तविक आंकड़े को स्वीकार करे। कोविड से कोई एक दिन में नहीं मरता। चुनाव के दौरान अगर कोई प्रशिक्षण लेने आते समय, प्रशिक्षण लेते समय अगर संक्रमित हुआ और बाद में मौत हो गई तो उसके परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए।
पंचायत चुनाव के दौरान जिले में 14 शिक्षक, शिक्षामित्रों की मौत की रिपोर्ट निर्वाचन कार्यालय को दी गई है। इसमें एक शिक्षक की मौत सड़क हादसे में हुई। वे चुनाव का प्रशिक्षण लेने जाते समय हादसे का शिकार हुए थे।- डॉ. गोरखनाथ पटेल, बीएसए, सोनभद्र।
केस-1
मिर्जापुर जिले की निवासी अंजना सिंह परिषदीय स्कूल में अध्यापिका थीं। परिवार के लोग रेणुकूट में भी रहते हैं। इनके पति सूर्यजीत बताते हैं कि कोविड-19 से संक्रमित अंजना की 30 अप्रैल को मौत हो गई। दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है, एक पुत्र अभी पढ़ रहा है। घर में कमाने वाला और कोई नहीं है।
केस-2
डाला नई बस्ती निवासी विजय चुनाव का प्रशिक्षण लेने के लिए राबर्ट्सगंज आ रहे थे। इसी दौरान हादसे में उनकी मौत हो गई। उनके जाने के बाद एक पुत्र और एक पुत्री की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। पुत्र गौरव बताते हैं कि परिवार में कमाने वाले पिताजी ही थे। बहन बीएड, सीटेट, यूपी टेट की हैं। वह खुद बी-टेक कर रहे हैं।