वार्डों मे सेंट्रेलाइज ऑक्सीजन की नहीं हो रही आपूर्ति
स्वास्थ्य विभाग सिलेंडरों की कमियों को दूर करने में जुटा
जिला अस्पताल में 21 ऑक्सीजन सिलेंडर भर कर रखा गया
एसएनसीयू में इलेक्ट्रिकल ऑक्सीजन से बच्चों का इलाज हो रहा
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनभद्र। गोरखपुर मेडिकल कालेज हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमियों को दूर करने में जुट गया है। जिला अस्पताल में 21 ऑक्सीजन सिलेंडर को भर कर रिजर्व में रखा गया है। वार्डों में सेंट्रेलाइज ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है। लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति हो नहीं रही है। एसएनसीयू में इलेक्ट्रिकल ऑक्सीजन से बच्चों का उपचार किया जा रहा है। हालांकि 12 बच्चों के लिए ही बेड होने से कभी-कभार बच्चों को परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल के एसएनसीयू (नवजात शिशु रोगी कक्ष) में इलेक्ट्रिकल ऑक्सीजन से बच्चों का उपचार किया जाता है। एसएनसीयू में 12 बेड है। जबकि कभी-कभार 15 से 16 बच्चे उपचार कराने के लिए पहुंचते है। मजबूरी में स्वास्थ्य कर्मी एक बेड पर दो बच्चों का उपचार करते है। यहां इलेक्ट्रिकल ऑक्सीजन से बच्चों को दिया जाता है। वहीं वार्डों में जरूरत पड़ने पर रोगियों को सिलेंडरों से ऑक्सीजन दिया जाता है। जबकि सेंट्रेलाइज ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है। लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीबी गौतम का कहना है कि उनके पास करीब क्रियाशील 30 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। वर्तमान में 22 सिलेंडर भरे पड़े है। कहा कि एसएनसीयू (नवजात शिशु रोगी कक्ष) में इलेक्ट्रिकल ऑक्सीजन बच्चों को दिया जाता है। कहा कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर उपलब्ध है।
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इनसेट
जिले के सभी सीएचसी और पीएचसी पर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध है। राजकीय अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि खाली ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं रहने चाहिए। स्वास्थ्यकर्मी ऑक्सीजन सिलेंडर स्वंय भरवाते है।
डॉ. एसपी सिंह
सीएमओ सोनभद्र।
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सीएमओ और सीएमएस को अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है। अस्पतालों में ऑक्सीजन के अभाव में किसी रोगी के साथ कोई घटना घटित होती है तो संबंधितों को लापरवाह मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोद कुमार उपाध्याय
जिलाधिकारी सोनभद्र
प्रदीप चौबे