सोनभद्र। फाइलेरिया के प्रसार की स्थिति जानने के लिए जिले में ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (टास) चल रहा है। पांच मई से शुरू हुआ यह सर्वे क्यू फैट किट के माध्यम से किया जा रहा है। छह से सात वर्ष की आयु के बच्चों के बीच संचालित इस सर्वे में अब आठ दिन शेष हैं। अब तक 1300 बच्चों की जांच की जा चुकी है।
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सर्वे में पॉजिटिव मिलने वाले बच्चों को आशाओं की निगरानी में 12 दिन तक दवा दी जानी है। सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि जिले के पांच ब्लाॅकों में यह सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के लिए नगवां, चोपन, म्योरपुर, बभनी और राबर्ट्सगंज अर्बन ब्लॉक को चार ईयू ( इंप्लीमेंटेशन यूनिट) में बांटा गया है। प्रत्येक ईयू में 30 गांव या 30 स्कूलों के 6 से 7 वर्ष या कक्षा 1 या 2 में पढ़ने वाले बच्चों की जांच की जा रही है। अब तक 1300 बच्चों की जांच की जा चुकी है। चिह्नित स्कूलों और समुदायों में नियमित रूप से कैंप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई बच्चा पॉजिटिव पाया जाता है तो उसका तुरंत उपचार शुरू किया जाएगा। छह माह बाद उसका फिर परीक्षण किया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि अब उनमें फाइलेरिया संक्रमण है या नहीं। सर्वे से जुड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करें। हर बच्चे की जांच व्यक्तिगत रूप से और अनुकूल वातावरण में करें। पॉजिटिव पाए गए बच्चों को नियमानुसार पूर्ण दवा उपचार दें। यह सर्वे बच्चों की सुरक्षा और फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के खात्मे के लिए बेहद जरूरी है।