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लापता 13 बच्चों का नहीं चला पता

Wed, 25 May 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
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syria children - फोटो : mirror.co.uk
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दो वर्ष से लापता बेटे अजय के लौटने का इंतजार कर रहे राबर्ट्सगंज के रेलवे फाटक के समीप रहने वाले रामलायक मौर्य और उनकी पत्नी मंजू की आंखे पथरा गई हैं। अभी भी दंपती को विश्वास है कि उनका बेटा वापस आएगा। इस तरह से जिले के 13 परिवार अपनों के आने का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज करने के बाद भी पुलिस लापता लोगों को ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
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राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के सांगो गांव निवासी रामनायक सपरिवार वर्तमान में रेलवे फाटक के समीप खुद के मकान में रहते हैं। मंगलवार को रामनायक ने बताया कि तीन जुलाई, 14 को घर से उनका बड़ा बेटा अजय जो हार्डवेयर की दूकान चलाता था, लापता हो गया। कुछ दिनों तक रिश्तेदारी और संबंधितों के यहां उसकी खोजबीन की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। सात जुलाई, 14 को कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। लेकिन अभी तक पुलिस उसकी तलाश नहीं कर सकी। कहा कि 24 घंटे वह और उनकी पत्नी मंजू अजय के आने की राह देखते रहते हैं। शहर कोतवाली में वर्ष 2014 में 12 बच्चे लापता हुए थे, जिसमें से दस को पुलिस ने ढूंढ निकाला है। वर्ष 2015 में 16 लोगों के लापता होने की गुमशुदगी दर्ज हुई थी। जिनमें 13 वापस हो चुके हैं।
एक जनवरी, 2016 से अब तक तीन लापता हुए थे, जिसमें एक वापस आ गया है। एसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले के सभी थाना क्षेत्रों में वर्ष 2014 से 25 मई 2016 तक संदिग्ध परिस्थितियों में लगभग 43 लड़के और लड़कियां लापता हुई थीं।
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लापता लोगों के घरवालों के प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने करीब 30 बच्चों को बरामद कर उनके घरवालों को दे दिया गया। जबकि अभी भी 13 बच्चों की तलाश जारी है। जिनके लड़के और लड़की वापस नहीं आए है वे अपनों के आने की इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं।
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