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निजीकरण के विरोध में आंदोलन रहा जारी

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सोनभद्र (ओबरा)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का 28 मार्च से शुरू हुआ आंदोलन तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में कर्मचारियों के पक्ष में सांसदों और विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निजीकरण पर पुनरविचार करने की मांग की।
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भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बिजली वितरण के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की है। लिखा है कि निजी क्षेत्र का एकमात्र उद्देश्य मुनाफा कमाना है और वह सार्वजनिक क्षेत्र का विकल्प कभी नहीं हो सकता। निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। अनपरा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों एवं प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार के बीच शुक्रवार को शक्ति भवन में हुई वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता के दौरान संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत वितरण के निजीकरण एवं फ्रेंचाईजी का प्रयोग पूरे देश में विफल हो चुका है। उड़ीसा में निजी कंपनियों की अक्षमता के चलते उनके लाइसेंस नियामक आयोग रद्द कर चुका है। इसी प्रकार औरंगाबाद, जलगांव, भागलपुर, उज्जैन, ग्वालियर और सागर के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाईजी के करार फ्रेंचाईजी की विफलता के कारण नियामक आयोग रद्द कर चुका है। समिति ने कहा कि आगरा में भी बड़ा घोटाला चल रहा है जिसकी उच्च स्तरीय जांच होना जरूरी है। ऐसे में आगरा फ्रेंचाईजी का हवाला देकर पांच अन्य शहरों व सात जिलों का निजीकरण करना और बड़े घोटाले को जन्म देगा। संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था में कारगर सुधार के लिए संघर्ष समिति गुजरात मॉडल और पटियाला मॉडल के आधार पर सुधार के प्रस्ताव काफी पहले दे चुकी है। वार्ता में प्रबंधन की ओर से प्रमुख सचिव ऊर्जा के साथ प्रबंध निदेशक अपर्णा यू और निदेशक कार्मिक एसपी पांडेय उपस्थित रहे। संघर्ष समिति की ओर से शैलेंद्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पांडेय, महेंद्र राय, मोहम्मद इलियास, करतार प्रसाद, पीएन तिवारी, परशुराम, पीएन राय, आरएस वर्मा उपस्थित थे।
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