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Sonebhadra News: चार ट्रकों से चूने की बोरियों में छिपाकर रखा 1150 पेटी कफ सिरप बरामद, आठ गिरफ्तार

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प्रतिबंधित कफ सिरप के मामले में पकड़े गए आरोपी। संवाद
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सोनभद्र। सोनभद्र पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने गाजियाबाद से चार ट्रकों से से चूने की बोरियों में छिपाकर रखा 1150 पेटी प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद किया है। तस्करों के सरगना सहित आठ आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। उनके पास से 20 लाख नकदी, एक कार, फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी सोनभद्र से बिहार, झारखंड और बंगाल के रास्ते बांग्लादेश कफ सिरप भेजते थे।
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सोनभद्र की एसओजी-राॅबर्ट्सगंज पुलिस टीम के साथ गाजियाबाद की स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच, नंदग्राम पुलिस की टीम ने सोमवार की रात मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम परिसर में संचालित बरेली-गोरखपुर ट्रांसपोर्ट के गोदाम पर दबिश दी। वहां आठ तस्कर दबोचे गए। उनकी निशानदेही पर वहां खड़े चार ट्रकों से चूने के बोरी में छिपाकर 1150 पेटी कफ सिरप (850 पेटी एस्कफ और 300 पेटी फेंसाडिल) बरामद किया गया। इसमें 100 मिलीग्राम की कुल 1.57 लाख शीशी रखी हुई थी। आरोपियों के कब्जे से क्रेटा कार, 20 लाख नकद, दो लैपटॉप, 10 मोबाइल, फर्जी सिम, मुहर, 19 पत्ता टापेंटाडोल एक्टेंडेट रिलीज टैबलेट्स सहित कई दस्तावेज बरामद किए गए। गाजियाबाद पुलिस के मुताबिक पकड़े गए वाहनों की बुकिंग इंदौर से गुवाहाटी चूना ले जाने के लिए की गई थी। आरोपियों की तरफ से अलग-अलग फार्मा-फर्मों की मुहर, लेटर पेड भी बनवाए गए थे। एस्काफ सिरप का उत्पादन लेबोरेट फार्मा, पोंटा साहिब, हिमाचल प्रदेश और फेंसीडिल का उत्पादन एबॉट फार्मा बद्दी हिमाचल प्रदेश में होता है। एबॉट फार्मा बद्दी ने दिसंबर 2024 से फेंसीडिल का उत्पादन बंद कर दिया था। बावजूद अवैध तरीके से उत्पादन-आपूर्ति की जा रही थी।



हर तस्कर की अलग-अलग थी भूमिका
गाजियाबाद के इंद्रापुरम का निवासी सौरभ त्यागी इस गिरोह का मुख्य संचालक है। वहीं के गढी माजरा भट्ठा-मधुबन बापूधाम निवासी संतोष भडाना गिरोह का मुख्य ट्रांसपोर्टर है। उसी के गोदाम से माल को ट्रकों में शिफ्ट किया जाता था। मेरठ के रहने वाले आसिफ और वाराणसी के शुभम जायसवाल की भूमिका मुख्य सरगना की है। इसके निर्देशन में देश के अलग-अलग भागों से कफ सिरप को तस्करी कर बांग्लादेश भेजा जाता है। एनसीआर में कफ सीरप को एकत्रित करने का काम सौरव त्यागी के जिम्मे था।
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पहले जुटाते थे सिरप, फिर करते थे तस्करी
सौरभ के पास आरएस फार्मा फर्म इंदिरापुरम का लाइसेंस है। वह इसके जरिए फर्जी फार्मा कंपनियों का लाइसेंस लेकर नई दिल्ली के वान्या इंटर प्राइजेज से कफ सिरप खरीदता था। वान्या के पास लैबोरेट फार्मा और एबॉट फार्मा का वेयर हाउस है, जहां कंपनी के उत्पादित सिरप रखे जाते हैं। इस सिरप को बरेली-गोरखपुर ट्रांसपोर्ट के गोदाम पर लाया जाता था। यहां आसिफ-वसीम मांग की जानकारी देते थे। सौरभ दूसरे पदार्थों के परिवहन का कागजात बनाकर सिरप को झारखंड, बंगाल, असम आदि प्रदेशों में भेजता था। जहां से बंगाल तस्करी की जाती थी। शादाब और शिवाकांत सौरभ के कर्मचारी हैं, वह इसे ट्रकों पर लोड कराने और उसका रिकर्ड दुरूस्त रखते थे। ट्रांसपोर्ट का कर्मचारी अंबुज सिरप को गोदाम में छिपाने का काम करता था। अन्य आरोपी चालक के रूप में उसे ट्रकाें से बताई जगह पहुंचाने का काम करते थे।

वर्जन -
पुलिस टीम का काम सराहनीय रहा है। कामयाबी पाने वाली टीम के उत्साहवर्धन के लिए 50 हजार का नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। - जे रविंदर गौड़, पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद।

18 अक्तूबर की रात चुर्क मोड़ के पास दो ट्रक कफ सिरप पकड़े गए थे। इसके बाद एसआई घनश्याम तिवारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गाजियाबाद भेजी गई। वहां से मिले इनपुट पर रांची से एक ट्रक और गाजियाबाद से चार ट्रक कफ सिरप पकड़ा गया। पुलिस टीम को पुरस्कृत किया जाएगा। - अभिषेक वर्मा, एसपी सोनभद्र।
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