नीति आयोग ने विकास के लिए देश के 115 अति पिछड़े जिलों का चुना है। इसमें सोनभद्र भी शामिल है। यहां सिंचाई के संसाधनों की कमी से सैकड़ों एकड़ भूमि बंजर पड़ी है। सूखा पड़ने पर खेतों की सिंचाई नहीं होती। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कृष्णा राज गुरुवार को जिले में आएंगी। वे यहां दोपहर बाद साढ़े 12 बजे कलेक्ट्रेट में अफसरों के साथ बैठक करेंगी और कृषि विकास पर मंत्रणा करेंगी। विभिन्न विभागों के अफसर अपने-अपने विभाग का प्रेजेंटेशन करेंगे।
झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा से सटे इस जिले के सीमावर्ती इलाकों में नदी-नाले हैं, लेकिन सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। बिहार बार्डर पर कर्मनाशा नदी है। इस नदी के किनारे करीब दर्जन भर से अधिक गांव हैं लेकिन यहां कोई सिंचाई परियोजना अब तक नहीं लगाई गई। इससे किसान मायूस होते हैं। जसौली सिंचाई परियोजना पर काम नहीं हो सका। छत्तीसगढ़ बार्डर पर करीब तीन दशक से कनहर सिंचाई परियोजना का काम चल रहा। वह अब तक पूरा नहीं हुआ। मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड बार्डर पर सोन नदी है, लेकिन बार्डर के गांवों में अब तक सिंचाई के संसाधनों पर काम नहीं हो सका। इसका नतीजा है कि जिले की अधिकतर भूूमि अब भी सिंचाई सुविधा से वंचित है। गुरुवार को जिले में आ रही केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कृष्णा राज कलेक्ट्रेट में अफसरों के साथ बैठक लेंगी। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि इस बैठक में सभी विभाग अपने-अपने विभागों का प्रेजेंटेशन मंत्री के समक्ष करेंगे।