अनपरा(सोनभद्र)। सोनभद्र में और सिंगरौली में प्रदूषण के खराब हालात और इसका लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ते प्रभाव को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने नाराजगी जताई है। चेयरपर्सन आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने दो दिन पूर्व सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सचिवों को निर्देशित किया है कि वह दोनों जिलों में स्वास्थ्य की स्थिति और उस पर पड़ते प्रदूषण के प्रभाव के बाबत सर्वे एवं अध्ययन का काम दो महीने के भीतर पूरा कर लें। इसके बाद इसकी एक रिपोर्ट एनजीटी की ओवरसाइट कमेटी को सौंप दी। ताकि स्थिति पर नियमित निगरानी बनाई रखी जा सके।
एडवोकेट अश्वनी कुमार दुबे ने बताया कि तीन जनवरी को मामले को लेकर सुनवाई हुई। पूर्व में प्रदूषण के रोकथाम और प्रभाव के विस्तृत अध्ययन के लिए दिए गए सुझाव एवं निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई। कोर्ट ने पाया कि कोयला खदानों में राख भराव, सड़क से कोल परिवहन रोकने को लेकर प्रभावी कदम अब तक नहीं उठाए जा सके हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए कोयला खदानों में राख पटाव सुनिश्चत कराने और सड़क मार्ग से कोल परिवहन पूरी तरह बंद कराने का निर्देश दिया। साथ ही आदेशित किया कि यूपी-एमपी दोनों राज्यों के स्वास्थ्य सचिव सोनभद्र-सिंगरौली में प्रदूषण का लोगों पर पड़ते प्रभाव और उनको राहत के लिए उठाए जा रहे कदम की विस्तृत जानकारी दो महीने के भीतर ओवरसाइट कमेटी को सौंप दे। साथ ही प्रदूषण प्रभावित दोनों जिलों के प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ पानी उपलब्ध हो, इसके लिए पाइपलाइन व्यवस्था तत्काल अमल में लाई जाए। बताते चलें कि एनजीटी के निर्देश पर 2015 में एनजीटी की कोर कमेटी ने विस्तृत अध्ययन किया था। उस दौरान यह सामने आया कि फ्लोराइड के साथ मरकरी का खासा प्रभाव है। इसको देखते हुए मरकरी के विस्तृत अध्ययन के लिए म्योरपुर, औड़ी में केंद्र स्थापना, उच्च सुविधा, चिकित्सा विशेषज्ञों से युक्त अस्पताल के स्थापना का सुझाव दिया गया था लेकिन उस पर अब तक अमल नहीं हुआ। माह भर पहले ओवरसाइट कमेटी के चेयरमैन राजेश कुमार ने भी दौरा कर स्थितियां जांची थी जिसमें कई सुझावों पर अमल नहीं मिला।