कहने को तो जिला राजकीय पुस्तकालय में 685 सदस्य हैं मगर पुस्तकों के प्रति सोशल साइड और इंटरनेट ने लोगों का रूझान कम कर दिया है। इतनी बड़ी सदस्यों की संख्या के बावजूद पुस्तकालय में किताबें पढऩे वालों की संख्या चंद लोगों की है। यहां महज 30-35 सदस्य ही पुस्तकालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इनमें अधिकत संख्या छात्र छात्राओं की होती है। या वे लोग यहां आते हैं जिन्हें किताबें बाहर नहीं मिलती हैं।
राजकीय जिला पुस्तकालय में सदस्यों की संख्या 685 है। किताबों की संख्या भी कम नहीं है। विषय ज्ञान से लेकर किस्सा कहानियों के अलावा सामान्य ज्ञान की पुस्तकों की संख्या 30 हजार से अधिक है। इतनी किताबों का जखीरा व सदस्यों की भारी संख्या के बावजूद यहां प्रतिदिन 30 से 35 सदस्य ही आते हैं। यह तो राजकीय पुस्तकालय की हाल है। इसके अलावा जिले में 15 और भी पुुस्तकालय हैं। किताबों के प्रति लोगों का रूझान कम होने के कारण तमाम लोगों को यह भी मालूम नहीं कि पुस्तकालय कहां-कहां है। इंटरनेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी के कारण पुस्तकों से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है। आज के युग में लोग नेट में फंसते जा रहे हैं। यही कारण है कि लोगों और किताबों के बीच की दूरी को पाटने के लिए विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है।
जिला पुस्तकालय के प्रभारी लक्ष्मी शंकर की मानें तो जिले में राजकीय पुस्तकालय का संचालन वर्ष 1991 में शुरू हुआ। शुरूआती दौर में पुस्तकालय से जुडऩे के लिए लोग सक्रिय रहे। इसकी एक वजह यह भी ती कि पहले सदस्यता शुल्क महज सौ रुपये ही था। पांच साल बाद इसकी सदस्यता शुल्क बढ़ाकर दो सौ रुपये कर दी गई। जिस वक्त सदस्यता शुल्क सौ व दो सौ रुपये रहा, सदस्य बनने की रफ्तार भी ठीक ठाक रही लेकिन सदस्यता शुल्क 530 रुपये करने के बाद लोगों का पुस्तक पढऩे की तरफ रूझान कम हो गया।
बोले साहित्यकार...
वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर कहते हैं कि युवा पीढ़ी पुस्तकों से भले ही दूर होती जा रही लेकिन पुराने लोगों का रूझान अभी भी किताबों की तरफ है। आधुनिकता की चमक में भले ही पुस्तक पढऩे वाले कम हो गए हैं लेकिन पुस्तकों की उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता है।
साहित्यकार रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि पुस्तक की जरूरत कभी कम नहीं होगी। सोशल साइड या फिर इंटनरेट की व्यवस्था सभी के पास नहीं है। इसके अलावा पुस्तकों से सामान्य ज्ञान से लेकर तमाम जानकारी पन्ना पलटने से हो जाती है। ऐसे में पुस्तक पढ़ने़ वालों की तादाद कम हो सकती है लेकिन उसकी उपयोगिता कम नहीं हो सकती।