सोनभद्र। सस्ते गल्ले की दुकानों पर निगरानी रखने के लिए जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय, ग्रामीण और नगरीय स्तर पर सतर्कता समितियों का गठन किया जाता है। लेकिन खाद्य एवं रसद विभाग की यूपी की वेबसाइट पर सोनभद्र में यह गठन शून्य बता रहा है। जबकि जिला पूर्ति अधिकारी राकेश तिवारी का कहना है कि जिले की सभी 725 दुुकानों पर सतर्कता समितियां गठित हैं। पूर्व में जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठकें भी हो चुकी हैं।
सोनभद्र जिला बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा हुआ है। इन राज्यों की सीमाओं पर स्थित ग्राम पंचायतों में सस्ते गल्ले की कई दुकानें हैं। पूर्व में तमाम दुकानों से राशन की कालाबाजारी चरम पर होती थी। कई बार ग्रामीणों ने सरकारी अनाज लदे वाहनों को रात में पकड़ कर पुलिस के हवाले भी किया था। लेकिन स्थिति संभलने का नाम नहीं ले रही थी। अक्सर कार्डधारक भी कोटेदारों पर मानक के अनुरूप अनाज और मिट्टी तेल न देने का आरोप लगाते रहते थे। इसको ध्यान में रखते हुए जिले में कोटे की दुकान स्तर पर सतर्कता समितियों के गठन का निर्णय हुआ। जिले में सस्ते गल्ले की फिलहाल 725 दुकानें हैं और सभी पर समितियों का गठन किया जा चुका है लेकिन यूपी की खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर जो आंकड़े हैं, वह कुल अलग ही हैं। वेबसाइट पर सोनभद्र जिला 71वें स्थान पर है और इसमें आठ ब्लॉकों में से एक में भी सतर्कता समितियों का गठन नहीं हुआ दर्ज है। जबकि जिला पूर्ति अधिकारी राकेश तिवारी का कहना है कि जिले की सभी 725 सस्ते गल्ले की दुकानों के साथ ही ब्लॉक और जिला स्तरीय सतर्कता समितियों का गठन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अभी नौ ऐसी नव सृजित ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें सस्ते गल्ले की दुकानों का चयन नहीं हो सका है। इस नाते इन जगहों पर सतर्कता समितियों का गठन नहीं हो सका है।