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तिरंगा लहराये सदा जनगण मन जै बोलियों से..........

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शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी के तत्वावधान में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर मंगलवार को मंडी मुहाल में काव्य गोष्ठी हुई। कवि प्रद्युम्न त्रिपाठी ने सूझै ना रहिया माई केहू ना देखात बा, बीचे भंवर में नइया डूबत उतरात बा तथा तिरंगा लहराये सदा जनगण मन जै बोलियों से सुनाकर भारत-भारती को नमन किया।
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सुनील कुमार ने दहेज पर हास्य रचना किस्मत फूटि गइल बिटिया के नक पोछना संग कबाड़े से, सुनाकर सभी को हंसाया। धर्मेश चौहान ने रोकना गर्त में जाने से मुल्क को, बृजमोहन तिवारी ने भारत मां के वीरों का अंदाज निराला होता है सुनाया। अरुण त्रिपाठी ने एक कंठ से सभी पुकारिये भारती की आरती उतारिये सुनाया। राकेश शरण मिश्र ने भारत की गैरत को फिर से दुश्मन ने ललकारा है, दिलीप सिंह दीपक ने हम सरहदी के बेटे हैं वफादारी सिखाओ मत सुनाकर राष्ट्र चिंतन का जज्बा जगाया। व्यंग्य के माध्यम से फागुनी बहार पर जै राम सोनी ने रंगउ भंग के बाटै महातम फागुन मा बुढ़वा देवर लागै सुनाकर खूब हंसाया। ओज के कवि राधेश्याम पाल ने शहादत दे रहे सैनिक वतन की लाज रह जाये प्रभावोत्पादक रही। संचालक अशोक तिवारी ने जिगर के जख्म का एहसास दिलाया न करो, गजल सुनाकर वाहवाही लूटी। गजेंद्र नाथ दीक्षित ने जो नहीं डरता वो मरके भी नहीं मरता, सुनाकर आजाद को नमन किया। अध्यक्षता रामनाथ शिवेंद्र एवं संचालन अशोक तिवारी ने की। ठाकुर कुशवाहा, फारुख अली, संगीता, वेदमणि तिवारी, श्यामलाल आदि मौजूद रहे। काव्य पाठ डीबीए के पूर्व अध्यक्ष आत्म प्रकाश त्रिपाठी के आवास हुइग्र। अंत में अबीर-गुलाल लगाकर कार्यक्रम संपन्न किया गया।
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