सोनभद्र। जिले में कई जगहें सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और बाजारों में अक्सर जाम की स्थिति रहती है। ऐसे में डग्गामार स्कूली बस बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। जर्जर सड़कों पर अक्सर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विद्यालय प्रबंधन भी बसों और आटो में ज्यादा बच्चों को भरे जाने को लेकर गंभीर नहीं है। इससे स्कूली बच्चे खतरों के बीच बसों, आटो से सफर कर रहे हैं।
उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में 171 बस समेत अन्य वाहन स्कूलों के लिए पंजीकृत है। वाहनों के क्षमता के अनुसार बच्चों को ले जाने की अनुमति दी गई है। लेकिन नियमों को ताख पर वाहनों से बच्चों को ले जाया जा रहा है। जिले में बगैर पंजीयन कराए सौ से अधिक बस, मैजिक, आटो समेत अन्य वाहन विभन्न स्कूलों का नाम लिखकर चल रहे हैं। स्कूलों की जब छूट्टी होती है तो अक्सर राबट्र्सगंज के बढ़ौली चौक से सिविल लाइंस रोड, मेन मार्केट, नवीन सब्जी मंडी तक जाम की नौबत उत्पन्न हो जाती है। जाम में फंसने से वाहनों मेें भूसे की तरह बैठे बच्चें व्याकुल हो जाते हैं। इसी तरह रेणुकूट, दुद्धी, ओबरा समेत अन्य शहरों मेें स्कूलों की छूट्टी होने पर समस्याएं देखने को मिलती है। वहीं उपसंभागीय परिवहन अधिकारी अवधेश सिंह का कहना है कि क्षमता से अधिक बच्चों को ढोने वाले वाहनों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जा रही है। एक जुलाई 2017 से अब तक करीब 33 स्कूली बस समेत अन्य वाहनों का चालान किया जा चुका है। अभी भी कार्रवाई जारी है।