सीएम योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव
समाजवादी पेंशन पर रोक लगाने की घोषणा होते ही लाभार्थियों में हड़कंप मच गया है। पेंशन बंद होने के शासनादेश अभी प्रशासनिक अमले को नहीं मिला है बावजूद पेंशन की पत्रावलियों की जांच पड़ताल शुरू कर दी गई। पेंशन बंद होने से जिले से 1.44 लाख महिला और पुरुष प्रभावित होंगे।
बताते चलें कि सपा सरकार की महत्वाकांक्षी समाजवादी पेंशन योजना के तहत जिले में एक लाख 44 हजार लोग समाजवादी पेंशन के लिए चयन किए गए थे।
पेंशन देने के लिए शासन ने दायरा निर्धारित किया था कि जिस व्यक्ति के पास ट्रक, बस, ट्रैक्टर, बाइक या आठ बीघे से अधिक भूमि, होगी यह पेंशन के दायरे में नहीं आएगा।
साथ ही जिसकी सरकारी नौकरी होगी या किसी अन्य योजना से पेंशन का लाभ लेता होगा तो उसे समाजवादी पेंशन नहीं मिलेगा। वरीयता के आधार पर अन्य पेंशन से वंचित विकलांग, विधवा, वृद्वा, असहाय और गरीबों का चयन करना था।
लेकिन शासन के गाइड लाइन को दरकिनार कर अपात्रों को भी पेंशन के लिए चयनित कर लिया गया। इसकी शिकायत पूर्व में जिला प्रशासन तक पहुंची थी। शिकायत की जांच होने पर कुछ अपात्रों का पेंशन से नाम काटा गया। लेकिन अभी कुछ ले रहे थे।
जिला समाज कल्याण अधिकारी कन्हैया लाल गुप्ता ने बताया कि अब तक तीनों तहसील क्षेत्र में लगभग एक लाख 44 हजार लोगों को पेंशन मिलता था। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास शासन से पेंशन बंद करने से संबंधित कोई गाइड लाइन नहीं आई है। लेकिन वह लोग चयनित लाभार्थियों को ही पेंशन दे रहे थे।