सीतापुर। बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी व बारिश से घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है। अभी बाढ़ सरीखे हालात नहीं हैं पर उफनाई नदियां खतरे के संकेत देने लगी हैं। घाघरा से जुड़े नाले व तालाब उफान पर हैं। रविवार को नाले में डूबकर एक ग्रामीण की मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीण कड़ी मशक्कत से दो घंटे बाद शव निकाल सके।
घाघरा व शारदा का बढ़ता जलस्तर देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदे दहशत में हैं। जिले में बाढ़ आने पर सबसे अधिक रेउसा क्षेत्र प्रभावित होता है। यहां हर साल घाघरा रौद्र रूप धारण कर तबाही मचाती है। इस बार भी बारिश शुरू होते ही घाघरा का जलस्तर बढ़ने लगा है।
उधर, बैराजों से रोजाना छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी भी घाघरा व शारदा को धीरे-धीरे विकराल बनाता जा रहा है। नदियों से जुड़े नाले व तालाब तक उफान पर हैं। रविवार को रेउसा क्षेत्र के लोधपुरवा द्वितीय में रहने वाला रामजीवन (45) मवेशी चराने निकला था।
गांव के उत्तर बहने वाले उफनाए नाले को किसी तरह पार कर वह मवेशी चराने चला गया। सायं करीब पांच बजे वापस लौटते समय नाले के तेज बहाव में वह डूब गया। हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने नाले में डूबे रामजीवन की तलाश शुरू कर दी।
इस बीच रेउसा पुलिस भी पहुंच गई। दो घंटे की मशक्कत के बाद रामजीवन का शव बरामद किया जा सका। थाना प्रभारी ने बताया शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं।
मृतक का इकलौता बेटा राकेश (10) साथियों के संग कांवड़ लेकर गोला गया है। सोमवार को कांवड़ चढ़ाने के बाद उसे वापस आना है। इस बीच यहां हादसा हो गया। बेटे को पता ही नहीं कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। नाले से रामजीवन का शव निकाले जाते ही उसकी पत्नी मुन्नी देवी पछाड़ खाकर गिर पड़ी। रो-रोकर परिवारीजन का हाल बुरा है।
बिसवां तहसीलदार राजकुमार गुप्ता हादसे की खबर पाकर देर शाम करीब साढ़े सात बजे गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार को सांत्वना प्रदान करते हुए हालातों का जायजा लिया। तहसीलदार ने बताया कि दैवीय आपदा के तहत पीड़ित परिवार को सहायता दिलाई जाएगी।