कहीं ढोल पर थिरकती साधु-संतों की टोली तो कहीं डमरू की लय पर रामनाम का जाप। मंजीरे के साथ सीताराम का जाप करता भक्तों का सैलाब। परिक्रमा के पथ पर निकला सैलाब जिसने भी देखा वह मानो धन्य हो गया। आस्था, संस्कृति व विश्वास का यह संगम सोमवार को 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर दिखा।
भोर में डंके की आवाज के साथ शुरू हुआ यह सफर दोपहर बाद 16 किलोमीटर दूर अपने पहले पड़ाव कोरौना पहुंचा। यहां रात्रि विश्राम के बाद परिक्रमा मंगलवार भोर अपने अगले पड़ाव को कूच करेगी।
परिक्रमार्थी 11 पड़ाव को पार कर 9 मार्च को मिश्रिख पहुंचेंगे, जहां परिक्रमा संपन्न होगी। परिक्रमा में करीब 4 लाख श्रद्धालु शामिल हैं। नैमिषारण्य से शुरू होने वाली ऐतिहासिक परिक्रमा के लिए रविवार से ही साधु, संत व श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचने लगे थे।
सोमवार भोर डंके की आवाज सुनकर लोगों ने चक्रतीर्थ व गोमती में डुबकी लगाई। इसके बाद भगवान गणेश भगवान को लड्डू का भोग लगाया। पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने नैमिषारण्य में मां ललिता देवी मंदिर, हनुमानगढ़ी, कालीपीठ, व्यास गद्दी समेत मंदिर व मठों में पूजन किया और सीताराम का जयघोष लगाते हुए 84 कोसी परिक्रमा पथ पर निकल पड़े।
परिक्रमा पर निकले श्रद्धालु, साधु-संत इस कदर भक्ति में लीन थे, कि उन्हें ‘सीताराम’ के नाम के अलावा कुछ नजर ही नहीं आ रहा था। कोई बांसुरी की धुन छेेड़ रहा था, तो कोई ढोल व ढपली की थाप पर राम नाम का जयकारा लगाता था।
परिक्रमा में जात-पांत व अमीरी-गरीबी का भेद नहीं था। कोई हरियाणा से यहां आया था तो किसी को सरहद की सीमा भी न रोक सकीं। इनकी भाषाएं अलग-अलग थीं, लेकिन सभी रामधुन का मतलब बखूबी जानते थे। आस्था का अद्भुत नजारा देखने को लोग भी भोर होते ही परिक्रमा पथ पर बैठे थे।
कुछ लोग हाथी, घोड़े व बैलगाड़ियों के सहारे परिक्रमा करते दिखे। परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वालों गांवों की महिलाएं भी परिक्रमार्थियों के दर्शन कर परिक्रमा की कृपा पाने की लालसा में खड़ी थीं। नैमिष से शुरू हुआ यह सफर कई रास्तों से होता हुआ दोपहर बाद 16 किलोमीटर की दूर तय कर पहले पड़ाव कोरौना पहुंचा।
इस सैलाब के आगे पड़ाव स्थल एकदम छोटा पड़ा गया। लंबी दूरी तय करने के बाद भी श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान की जगह सुकून दिख रहा था। पहले पड़ाव पर पहुंचकर साधु, संत व श्रद्धालुओं ने खेत, बाग व सड़कों के किनारे डेरा जमा दिया। कोरौना क्षेत्र की करीब 6 किलोमीटर की परिधि में हर तरफ परिक्रमा का परचम लहरा रहा था। यह परिक्रमा 9 मार्च को अपने 11 वें पड़ाव मिश्रिख पहुंचेगी।