सीतापुर/रेउसा। पहाड़ों पर बीते तीन दिनों से भारी बारिश हो रही है। ऐसे में गांजरी क्षेत्र में घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। नदी का पानी आबादी की ओर करीब सौ मीटर बढ़ चुका है। घाघरा के जलस्तर में इजाफे से संभावित बाढ़ को लेकर गांजरी के लोगों की धड़कने तेज हो गई हैं।
तटवर्ती गांवों के लोगों ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए सामान समेटना शुरू कर दिया है। जिले की तहसील बिसवां, लहरपुर व महमूदाबाद क्षेत्र के बड़े हिस्से में रहने वाले हजारों बाशिंदों की बाढ़ व कटान नियति बन गई है। हर साल बरसात में घाघरा व शारदा नदियों की बेकाबू लहरें तबाही की नई इबारत दर्ज कर जाती हैं।
उफनाई नदियों के आगोश में सैकड़ों आशियाने, हजारों बीघा फसलें व जमीनें समा जाती हैं। सैकड़ों ग्रामीण ऊंची जगहों पर तिरपाल के तंबू में रहने को विवश होते हैं। संतोष यादव बताते हैं कि नदी के बीच अभी तक जहां पर मिट्टी के टीले नजर आते थे, वहां अब पानी हिलोरे मारने लगा है।
घाघरा का किनारा भी आबादी की ओर पानी फेंकने लगा है। तकरीब सौ मीटर तक पानी नदी से बाहर निकल आया है। घाघरा के तट पर स्थित त्यागी महाराज के आश्रम के निचले स्तर तक पानी पहुंच गया है। शुक्रवार रात से रुक-रुककर होने वाली बारिश से नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है।
रविवार को रात नरेश व दिनेश नदी को निहार रहे थे। पूछने पर बोले फिलहाल बाढ़ के हालात नहीं हैं। लेकिन जलस्तर बराबर बढ़ने से बाढ़ की संभावना बन गई है।
घाघरा की उफनाती लहरों के शोर से तटवर्ती गांवों के बाशिंदे सहमे नजर आने लगे हैं। नाव पर लकड़ी लादकर ला रहे नगीनापुरवा के बचनू लाल ने बताया कि बाढ़ आने पर खाना बनाने के लिए सूखी लकड़िया नहीं मिलती हैं।
25 मजरे सबसे पहले होंगे प्रभावित
बाढ़ आने की दशा में घाघरा के तटवर्ती करीब 25 मजरे सबसे पहले प्रभावित होंगे। इनमें परमेश्वर पुरवा, दुर्गापुरवा, गार्गीपुरवा, कोनी, चौकी पुरवा, दर्जिन पुरवा, रामलाल पुरवा, लोधपुरवा, लालापुरवा, मरेली, जैतहिया, ठेकेदार पुरवा आदि शामिल हैं। यह मजरे घाघरा से महज एक से डेढ़ किमी. की दूरी पर हैं। इसलिए सबसे पहले नदी का पानी इन मजरों में घुसता है।
सड़क के किनारे बने खतरनाक रेनकट
पिछले दो दिनों से रुक-रुककर होने वाली बारिश से सीतापुर-बहराइच मार्ग के दोनों ओर खतरनाक रेनकट बन गए हैं। मारूबेहड़ तिराहे से चहलारी घाट पुल तक करीब दो किमी. दूरी में सड़क के दोनों ओर गहरे गड्ढे होने से सड़क क्षतिग्रस्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। जल्द गड्ढे नहीं भरवाए गए तो सड़क को नुकसान हो सकता है। वहीं, हादसे का खतरा भी बन गया है।
बारिश से बांध में हो गए गड्ढे
सीतापुर के चहलारी घाट से बाराबंकी जिले के गनेशपुर तक करीब 54 किमी का बांध बाढ़ व कटान की रोकथाम के लिए बनाया गया है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। जिससे बांध क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडराने लगा है।
अनहोनी से निपटने को पीएसी ने डाला डेरा
संभावित बाढ़ की आशंका को लेकर किसी अनहोनी से निपटने के लिए एक टुकड़ी पीएसी ने डेरा डाल दिया है। रेउसा स्थित रामानुज संस्कृत विद्यालय में द्वितीय वाहिनी पीएसी बटालियन को रोका गया है।
बाढ़ राहत दल के पोस्ट इंचार्ज एचसी ने बताया वह किसी भी तरह के हालातों से निपटने को तैयार हैं। पीएसी की यह टुकड़ी चार बोट, दो स्टीमर, चार इलेक्ट्रॉनिक इंजन व अन्य जरूरी उपकरणों से लैस है।