रेउसा (सीतापुर)। गांजरी इलाके में सरयू व शारदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार को लगातार तीसरे दिन तक जलस्तर में बढ़ोतरी हुई। लहरों ने नदी के दायरे से बाहर निकल आबादी की ओर रुख कर लिया है। सरयू के किनारे बसे करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा लगातार मंडरा रहा है। बिगड़े हालात से तटवर्ती इलाके में हड़कंप है। सरयू का रौद्र रूप देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सुरक्षित ठिकाना तलाशने लगे हैं। बैराजों से सोमवार को फिर लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी जिले में पहुंचने पर गांजर वासियों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
पहाड़ों पर होने वाली भारी बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से सरयू व शारदा उफान पर हैं। सोमवार को पानी का तेज बहाव नदी के दायरे से बार निकला तो चहलारी घाट पुल के करीब स्थित त्यागी महाराज के आश्रम में निचले स्थानों पर भरने लगा। तमाम नालों के जरिए पानी आबादी की तरफ बढ़ने लगा है। सरयू के किनारे बसे समय दीनपुरवा, दुर्गापुरवा, मरेली, जटपुरवा, नगीनापुरवा, रेती, परमेश्वरपुरवा, खुशीरामपुरवा, लोधनपुरवा तथा जैतहिया आदि गांवों के मुहाने तक पहुंचकर लहरें हिलोरें माने लगी हैं।
इन गांवों के आसपास कई बीघा धान की फसल पानी में डूब चुकी है। जलस्तर में तेजी से वृद्धि होती देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की धड़कनें तेज हो गई हैं। बाढ़ की आशंका से भयभीत लोग सड़क के किनारे ठिकाना तलाशने लगे है। मवेशियों को ऊंची जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। नदियों में उफान मारती बेकाबू लहरों को देख ग्रामीण अबकी बाढ़ का कहर पिछले साल से अधिक होने का अनुमान लगा रहे हैं।
सोमवार को बैराजों से तीन लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है। बारिश भी हो रही है। लिहाजा, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। निचली जगहों पर पानी फैलने लगा है, लेकिन बाढ़ जैसे अभी कोई हालात नहीं हैं। तटीय इलाके में बराबर नजर रखी जा रही है। लेखपालों, प्रधानों के साथ ग्रामीणों से सतर्क रहने को कहा गया है।
- राजकुमार गुप्ता, तहसीलदार बिसवां