लहरपुर(सीतापुर)। शेखूपुर गांव में जैसे-जैसे हेपेटाइटिस की जांच आगे बढ़ रही मरीजों भी सामने आते जा रहे हैं। एक ही परिवार के तीन लोगों के संक्रमित मिलने के बाद मंगलवार को दो और लोग पॉजिटिव मिले हैं। अब इन मरीजों के वायरल लोड की जांच करवाई जाएगी।
बेहटा के सोनसरी गांव में हेपेटाइटिस के 141 मरीज मिले थे। इस गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर शेखूपुर गांव में भी संक्रमण फैल गया है। गांव में एक ही परिवार में पति-पत्नी व पुत्र ने लखनऊ में जांच करवाई। इसमें ये तीनों हेपेटाइटिस बी से पॉजिटिव मिले हैं।
सीएमओ के निर्देश पर सोमवार को गांव में शिविर लगाकर उनके घर के आसपास के 35 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में मंगलवार को दो और लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित मिले हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद वाजपेयी ने बताया कि मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की अपील
एक दूसरे के ब्लड कनेक्ट से बचे।
दाढ़ी खुद बनाएं और ब्लेड नष्ट कर दें।
एक दूसरे का जूठा खाना न खाएं।
सुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाएं।
नियमित दवाएं ले और जांच करवाएं।
डॉ. स्वास्ति बाजपेयी ने बताया कि हेपेटाइटिस सी के मरीजों का तीन से छह माह तक इलाज चलता है। इस दौरान मरीज आराम से ठीक हो जाते हैं। यह जरूरी नहीं है कि आप संक्रमित हैं तो शरीर में कोई दिक्कत होगी। कई बार यह संक्रमण शरीर में 8 से 10 साल बार असर दिखाता है। हेपेटाइटिस में लिवर ही प्रभावित होता है। इसलिए संक्रमित होने के बाद लिवर की स्थिति के अनुसार ही इलाज चलता है। हेपेटाइटिस बी में एक से दो साल तक इलाज चलता है। इसके बाद जांच करवाई जाती है। जांच के आधार पर इलाज आगे बढ़ाया जाता है। किसी भी मरीज को घबराने की जरूरत नहीं है।
यह हो सकते हैं लक्षण
हेपेटाइटिस में आमतौर पर कोई प्रमुख लक्षण सामने नहीं आते हैं। फिर भी कम भूख लगना, आंखें पीली होना, पेट में दर्द होना, पेशाब का रंग गहरा होना, थकान व बुखार न लगना भी वजह से हो सकती है।