हालांकि वन विभाग पगचिह्न न मिलने की बात कह रहा है, पर ग्रामीणों ने पगचिह्नों को मोबाइल में कैद कर लिया है। ग्रामीणों का दावा है कि यह पगचिह्न बाघ का ही है पर वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
धनधारी जंगल के निकट स्थित काशीपुर, राजेपारा, बहादुरपुर, छावन, अमटामऊ, सूरजपुर, अजगरा, समरहिया, गदखेरवा, ठाकुरगंज, मलनिया, कुमायू ग्रंट, जिहुरा, गोलई पुरवा, उदईपुर पश्चिमी आदि गांवों में बाघ की दहशत है।
ग्रामीणों को भय है कि कहीं कोहरे के कारण बाघ जंगल से भटककर आबादी में न घुस जाए। अमटामऊ निवासी महेश वर्मा, बहादुरपुर निवासी अनवर, लालमोहम्मद, वशीर अहमद, नई बस्ती निवासी विशाल, विकास व किशोर का कहना है कि बीते एक माह से इस क्षेत्र में बाघ मौजूद है।
बार-बार वह किसी न किसी ग्रामीण के सामने आ जाता है। खासकर मछरेेहटा से मिश्रिख मार्ग अधिक प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके वन विभाग पूरी तरह से बेफ्रिक है। वनकर्मी उल्टे ग्रामीणों को ही झूठा करार दे रहे हैं। सर्द मौसम में कोहरा खतरे को और बढ़ा रहा है।
कोहरे के कारण ग्रामीण घर व गांव से बाहर नहीं निकले। उधर, ग्रामीणों ने गोला बाबा देव स्थान के निकट जंगली जानवर के पंजों के निशान देखे हैं। वन विभाग पगचिह्न न मिलने की बात कह रहा है, वहीं ग्रामीणों ने पगचिह्नों को मोबाइल में कैद कर लिया।
ग्रामीणों का दावा है कि यह पगचिह्न बाघ का ही है। इससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ रही है। हालांकि इस संबंध में वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।