महोली (सीतापुर)। ब्रह्मावली गांव में मंगलवार सुबह फिर बाघ दिखने से दहशत फैल गई। ग्रामीणों का दावा है कि बाघ के साथ उसका शावक भी था। यह गांव महोली विधायक शशांक त्रिवेदी का गांव है। इससे वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर कांबिंग की। करीब 15 दिन पहले भी गांव स्थित मंदिर परिसर में बाघ के पगचिह्न मिले थे।
ब्रह्मावली महोली से भाजपा विधायक शशांक त्रिवेदी का पैतृक गांव है। यहां के निवासी अजीत बाजपेई, रजनीश त्रिवेदी, पिंटू बाजपेई, कमलेश तिवारी, अर्पित त्रिवेदी मंगलवार सुबह घर से खेतों की तरफ जा रहे थे। इस दौरान उन्हें ब्रह्मावली से सील्हापुर मार्ग को पार करते एक बाघ और उसका शावक दिखा। उसे देखते ही ग्रामीण डरकर गांव की तरफ भागे।
बताया कि वे सभी लोग एक साथ फसल की रखवाली व मवेशियों के लिए घास काटने जा रहे थे। बाघ गांव के ही कृष्णबली के खेत से निकलकर मार्ग पारकर श्रीकांत के बाग की तरफ जा रहा था। अर्पित ने वन विभाग को सूचना दी। वन क्षेत्राधिकारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कांबिंग में बाघ व शावक के पगचिह्न दिखे।
बता दें कि 15 दिन पहले ब्रह्मावली गांव के क्लेश हरण मंदिर परिसर में बाघ के पगचिह्न मिले थे। वनकर्मियों को कांबिंग के दौरान बाघ की दहाड़ सुनाई दी थी। जिससे वनकर्मी डरकर गांव की तरफ भागे थे। दूसरे दिन वहां पिंजरा लगाया गया था, लेकिन बाघ पिंजरे के आसपास भी नहीं फटका।
बाघ व शावक के मिले पगचिह्न
बाघ व उसके शावक के पगचिह्न मिले हैं। मंदिर के निकट लगा पिंजरा हटाकर गांव की दूसरी तरफ लगाया जाएगा। वहीं ग्रामीणों को सतर्क रहने व समूह में निकलने के लिए जागरूक किया गया है।
- कल्पेश्वर नाथ, वन क्षेत्राधिकारी