महोली (सीतापुर)। आधुनिक तकनीक के साथ ही किसानों का रुझान जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है। किसानों ने भी खेती के नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। शिक्षित किसान पुरानी परंपरा के आधार पर होने वाली खेती से तौबा करते हुए सब्जियों व मौसमी फलों की खेती पर अधिक जोर दे रहे हैं। तीन गांवों के किसानों की मेहनत से यहां सब्जी की खेती का हब बन रहा है।
महोली के किसान पारंपरिक खेती के अलावा आलू, गोभी, टमाटर व खीरा, ककड़ी शामिल कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। अमृतपुर गांव के अशोक दीक्षित पेशे से अधिवक्ता हैं। पिछले पांच वर्षों से सब्जी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पारिवारिक भूमि दो एकड़ है। जिसमें एक एकड़ भूमि में पांच वर्षों से सब्जी की खेती करते आ रहे हैं।
इस वर्ष तीन बीघा टमाटर व दो बीघा में खीरे की खेती पर जोर दिया है। जिसमें कम समय में अच्छा मुनाफा मिला है। उनका मानना है कि दो बीघा खीरे की खेती में फसल तैयार करने में तकरीबन डेढ़ लाख की लागत आई है। तीन माह में खीरे की फसल तैयार हो जाती है। बाजार भाव भी अच्छा मिल रहा है। उम्मीद है कि तकरीबन चार लाख का खीरा निकलेगा। वहीं इस बार टमाटर के दाम भी सही मिल रहे हैं। जिसमे भी अच्छा मुनाफा होने की संभावना बनी हुई है।
अमृतपुर गांव के ही किसान सोमिल अवस्थी, रजनीश, अनिल तीन तीन बीघा, गंगासागर, सौरभ, संजय दीक्षित, कुलदीप दो-दो बीघा भूमि पर खीरे की खेती कर रहे हैं। इनका मानना है कि तीन माह की खेती में अच्छा मुनाफा मिल जाता है। वहीं घर का तारा गांव में आधा सैकड़ा किसान सब्जी की खेती पर जोर दे रहे हैं। किसान जय दयाल मौर्य छह एकड़ के निजी काश्तकार है। जिसमें दो एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। बाकी चार एकड़ में सब्जी की खेती करते हैं। उनका मानना है कि गन्ने से अधिक मुनाफा सब्जी की खेती में है। जिसमे लागत भी कम लगती है।
ठेके पर जमीन लेकर कर रहे सब्जी की खेती
बड़ागांव के किसान बाला कश्यप एक एकड़ भूमि ठेके पर लेकर टमाटर,खीरा व ककड़ी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रबी खरीफ व गन्ने की खेती की अपेक्षा सब्जी व मौसमी फलों की खेती में अच्छा मुनाफा है। बड़ागांव के रामभवन सिंह ने इंटर तक पढ़ाई करने बाद खेती की तरफ अपना रुझान बढ़ाया है। वह एक एकड़ भूमि पर पिछले चार वर्षों से परवल, करेला व बैंगन की खेती कर रहे हैं। उनका मानना है कि परंपरागत खेती की अपेक्षा सब्जी की खेती से कम समय में अच्छा मुनाफा मिलता है।
समय से सिंचाई व दवाएं जरूरी
किसान कीटों से बचाव और पौध की बेहतरी के लिए सिंचाई के साथ-साथ दवाओं का छिड़काव भी समय-समय पर कर रहे हैं। किसान जयदयाल मौर्य ने बताया कि सब्जी की खेती में मौसम का कोई खास असर नहीं पड़ता है। सिंचाई भी कम करनी पड़ती है। अन्य फसलों की अपेक्षा सब्जी की खेती मुनाफे का सौदा साबित हो रही है।
गन्ने से हो रहा मोहभंग
महोली इलाका गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है लेकिन किसानों का मानना है कि गन्ने की फसल तैयार होने में एक वर्ष का समय लगता है। जबकि सब्जी की खेती में एक वर्ष के दौरान तीन फसलें तैयार होती हैं। महोली चीनी मिल बंद होने से गन्ने की पर्चियां समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। खेत खाली करने के साथ ही जोताई-बोआई भी प्रभावित होती है। अगली फसल की तैयारियों को लेकर औने-पौने दामों में गन्ना गु़ड बेल पर बेचना पड़ता है, जिससे अच्छा मुनाफा कमा पाना संभव नहीं होता है।