सिधौली/सीतापुर। तहसील क्षेत्र की बंजर जमीनें बिना किसी आदेश के खतौनी में दर्ज की गईं थीं। मामले में तहसील प्रशासन द्वारा लेखपालों पर कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई का लेखपाल लगातार विरोध कर रहे हैं। रविवार को उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अनुज सिंह ने मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ लेखपालों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। इस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम मिश्रिख के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह जांच कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सतेंद्र यादव, महामंत्री राधेश्याम यादव, उपशाखा सिधौली के अध्यक्ष मुकेश त्रिपाठी, मंत्री पवन राय, नीलेश कुमार आदि मौजूद रहे।
लेखपाल बोले, न्याय की उम्मीद बरकरार
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के अध्यक्ष सतेंद्र यादव ने बताया कि जिलाधिकारी से मिलकर न्याय मांगा है। उम्मीद है जांच कमेटी न्याय करेगी।
संविदाकर्मी से खाली कराया मकान
मामले में जिलाधिकारी ने रजिस्ट्रार कानूनगो हरिश्चंद्र को निलंबित कर दिया है। वहीं, सरकारी आवास पर कब्जा जमाए संविदाकर्मी डाटा इंट्री ऑपरेटर वीरेंद्र कुमार की पत्नी का नाम काशीपुर स्थित जमीनों की खतौनी में संदिग्ध हालात में दर्ज हो गया था। वीरेंद्र कुमार को पूर्व में नाजिर संयम खरे द्वारा सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था। अब इस आवास को तहसील प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है।
तहसीलदार विनोद सिंह ने बताया कि जांच शुरू होने के बाद तहसील क्षेत्र की जमीनें बिना किसी आदेश के बंजर से किसी अन्य के नाम दर्ज हुईं थीं। उन्हें वापस बंजर के रूप में दर्ज कर लिया गया है।