वन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक तेंदुआ पड़ोसी जिला लखीमपुर खीरी के दुधवा जंगल से भटक कर यहां पहुंचा है। उसके पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। डीएफओ के मुताबिक पकड़ा गया तेंदुआ नर है और उसकी उम्र महज चार साल के आसपास है। उसे मैलानी रेंज में छोड़ दिया गया है।
सिधौली के ग्राम कट सरैंया निवासी भोला सोमवार सुबह सात बजे नित्यक्रिया के लिए गांव के उत्तर स्थित तालाब की तरफ गया था। जैसे ही वह तालाब के पास पहुंचा तो सामने तेंदुए को लेटा देख सन्न रह गया। शोर मचाते हुए वह जान बचाकर गांव की तरफ भागा। इस पर तेंदुआ भी छलांग लगाते हुए गांव की ओर भागा।
रास्ते में जसवंतपुर निवासी मुख्तार व राजकुमार सामने पड़ गए। इस पर तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। दोनों ग्रामीण घायल हो गए। रास्ते से गुजर रहे डब्लू भी जख्मी हो गए। ग्रामीणों को घायल करने के बाद तेेंदुआ कट सरैंया निवासी रिक्की के घर में जा घुुसा।
तब तक यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल चुकी थी। ग्रामीणों ने घेराबंदी कर सुबह 7:25 पर सूचना पुलिस को दी। थोड़ी ही देर में डीएफओ एपी त्रिपाठी, सीओ आरएन सिंह, प्रभारी निरीक्षक रवींद्र नाथ राय, वन एसडीओ एबीएस सिंगरौर, रेंजर एके सिंह, इम्तियाज अहमद सिद्दीकी मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों का शोर सुनकर तेंदुआ यहां से निकलकर गांव के बाहर अरहर के खेत में जा छिपा तब तक वन कर्मियों ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया गया। उधर, दहशत के चलते ग्रामीण जरूरी सामान लेकर अपने-अपने घरों की छत पर चढ़ गए। कई युवा खलिहान के पास स्कूल व मंदिर की छत पर चढ़कर नजर गढ़ाए थे।
वन कर्मियों ने ग्रामीणों को शांत रहने की हिदायत देकर लखनऊ चिड़ियाघर से मदद मांगी। करीब दो घंटे बाद लखनऊ चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला अपनी टीम के साथ पहुंचे। यहां पर टीम ने घेराबंदी करते हुए टैंकुलाइजर गन से उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद टीम ने आननफानन उस पर जाल डाला।
दोपहर 3 बजे तेंदुए के पिंजड़े में कैद होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन अधिकारियों का कहना है कि तेंदुआ नरभक्षी नहीं है। उसने बचाव के लिए ग्रामीणों पर वार किया। अधिकारियों का दावा है कि पड़ोसी जिले लखीमपुर खीरी के दुधवा जंगल से भटक कर यहां आ गया होगा।
डीएफओ ने बताया कि लखनऊ चिड़ियाघर में तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। उसे एकदम स्वस्थ पाया गया है। देर शाम उसे मैलानी रेंज में छोड़ दिया गया।