जिले में रविवार को बाढ़ के पानी में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। इसमें सदरपुर में दो बच्चे व थानगांव में एक बालिका बाढ़ के पानी में समा गई। तीनों के शव बरामद हो गए हैं। जिले में अब तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। उधर, रविवार को घाघरा के जलस्तर में कमी आंकी गई है। नदियों में पानी घटने से कटान भी तेज हो गया है।
इससे क्षेत्र में मुसीबत अभी टलती नजर नहीं आ रही है। सदरपुर थाना क्षेत्र के लोनियनपुरवा निवासी सतीश (8) पुत्र सियाराम व नितिन (9) पुत्र रामसिंह रविवार दोपहर अपने पिता को खेत पर पानी देने गई थी। लेकिन दोनों वापस नहीं लौटे। शाम को परिवारीजनों ने तलाश की मगर पता नहीं चला। गांव के समीप चौका नदी पर इनकी साइकिल खड़ी मिलीं।
पूछताछ में पता चला कि दोनों नहा रहे थे। इस पर ग्रामीण व गोताखोर बुलाए गए। काफी मशक्कत के बाद चौका नदी में एक गड्डे में इनके शव बरामद किए गए। सूचना पाकर क्षेत्रीय विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा भी मौके पर पहुंचे। वहीं थानगांव का मानपुर दहला गांव भी बाढ़ग्रस्त गांव है।
रविवार को गांव का निवासी विश्राम परिवार के साथ गांव के बाहर खेत पर गया था। खेत के करीब ही नाला मौजूद है, जो इन दिनों बाढ़ की वजह से उफनाया हुआ है। विश्राम खेत की फसल देख रहा था, इसी बीच उसकी पुत्री विनीता (6) खेलते हुए नाले के करीब पहुंच गई। पैर फिसलने से वह बाढ़ के पानी में समा गई।
गांव के बाशिंदों ने आननफानन पानी में छलांग मारी, लेकिन विनीता नहीं मिल सकी। कुछ देर बाद उसका शव मिला। उधर, घाघरा नदी के जलस्तर में करीब 5 फीट की कमी देखने को मिली है, लेकिन नदी ने कटान तेज कर दी है।
इससे कोनी गांव के राम प्रसाद, गया प्रकाश, ललई, दुर्गापुरवा के भाईलाल, फौजदार पुरवा के हीरालाल, महराज सिंह, रामलालपुरवो के चेतराम, राधेश्याम, मुन्ना लाल, ज्वाला, सांवली, पहलवान आदि किसानों की करीब 75 बीघा खेती नदी में बह गई है। पचीसा टापू पर भी घाघरा नदी जबरदस्त तरीके से कटान कर रही है।
टापू पर लगा हैंडपंप कटान की चपेट में आकर बह गया है। वहीं टापू का 50 फीट चौड़ा व आधा किलोमीटर लंबा हिस्सा कटकर नदी में बह गया है। कटान इस कदर तेज है कि टापू पर बसे रामसिंह की नाव नदी में बहती चली गई। ग्रामीणों ने उसे चहलारी पुल के पास झाड़ियों में पाया है।
जहां बाढ़ व कटान ने पूरे क्षेत्र को परेशान कर रखा है, वहीं अब संक्रामक रोगों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। रविवार को बैराजों से 242362 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ पीड़ित इलाके में जलस्तर फिर से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सुकई पुरवा, सोमवारी पुरवा समेत कई गांवों में संक्रामक रोगों ने पांव पसार लिए हैं। इन गांवों में करीब 50 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। सोमवारी पुरवा गांव में रूपा, सुधाकर, शिल्पी, विनय, हरीलाल, अनीता, पंकज, अमित, रेखा, अंकुल, गुरु बचन, बबलू, धर्मवीर आदि बच्चे बीमार हैं।
इन सभी को उल्टी, दस्त, बुखार आदि की शिकायत है। इसी तरह से सुकई पुरवा गांव में गुड्डू, सोहन लाल, विजय, शिवा, पंकज, संजय, संतोष आदि बीमार पड़े हैं। क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो इस पूरे क्षेत्र में पानी के कम पड़ते ही संक्रामक रोगों ने तेजी से पांव पसार लिया है।
कोनी, रामलाल पुरवा, दुर्गा पुरवा, जैतहिया, नई बस्ती, लालपुर, रंडा कोडऱ, बगस्तीपुर, ठेकेदार पुरवा, पासिनपुरवा आदि करीब 300 से अधिक गांवों में जानवर बाढ़ की वजह से पानी में ही फंसे रहे। इस वजह से सैकड़ों की संख्या में जानवर बीमार हो रहे हैं।