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हजारों के हुजूम से संक्रमण का खतरा

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सीतापुर हाइवे पर बस की छत पर बैठ कर यात्रा करते लोग। - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। सैकड़ों लोगों को बाहर से जिले में आना व गुजरना हो रहा है। कोई सरकारी बस तो कोई प्राइवेट वाहनों से आ रहा है। कई लोग साइकिल, ठेलिया से भी सफर करते देखे गए। देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों से लोगों का आना जारी है। काफी लोग पैदल चलकर भी पहुंच रहे हैं। ये सभी कोरोना वायरस से बचने के लिए सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे हैं। ऐसे में कोरोना से युद्ध कैसे जीता जाए... इस पर भी सवाल उठ रहा है। अमर उजाला ने रविवार को पड़ताल की तो ग्राउंड पर कुछ ऐसा नजारा सामने आया।
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शहर के कांशीराम कालोनी के पास एक कतार में छह बोझा ढोने वाली ठेलियां खड़ी थीं। उन पर कुछ लोग बैठे थे तो कुछ पड़ोस में ही खड़े बिस्किट, गन्ना आदि खा-पी रहे थे। पूछा गया तो उनमें से अशोक कुमार ने बताया कि वह लोग दिल्ली से ठेलियों पर ही सवार होकर आए हैं। उनके काफिले में 29 लोग हैं। सभी लोग बिहार के खगरिया जिले के हैं। वे सभी दिल्ली में वर्षों से पल्लेदारी का काम करते थे। कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में उन्हें दिल्ली छोड़ बिहार का रुख करना पड़ा। वह लोग गुरुवार को दिल्ली से चले थे। चार दिन में ठेलिया से सीतापुर पहुंचे हैं। अभी उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का लंबा सफर तय करना है।
कुछ ऐसा ही आलम लखनऊ के मोहनलालगंज निवासी रोहित, अभिलास, सर्वेश गौतम, अजय व उमेश का भी था। नौ लोग शनिवार शाम दिल्ली से रोडवेज पर सवार हुए थे। बस ने उन्हें बरेली में उतार दिया था। उसके बाद आठ किलोमीटर पैदल चले। तब उन्हें ट्रक की सवारी मिली। ट्रक पर सवार होकर आए तो उसने सीतापुर में उतार दिया। सीतापुर नवीन चौक पर यह लोग भूखे, प्यासे घंटों सवारी का इंतजार करते रहे। बमुश्किल उन्हें फिर ट्रक मिल गया।
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जिसके बाद वह लखनऊ के लिए रवाना हुए। इन लोगों का दावा था कि रोडवेज बस चालक ने उनसे किराया भी ज्यादा लिया था। कुछ ऐसा ही हाल दिल्ली के वजीरनगर से यूपी के सुल्तानपुर जिले के लिए निकले राजेश, दीपक व सुनील का भी था। इसमें सुनील को फैजाबाद जाना था। यह लोग किसी तरह पैदल, ट्रक व अन्य सवारियों से सीतापुर पहुंचे गए थे, लेकिन यहां उन्हें सवारी नहीं मिले। सुबह नौ बजे तक यह लोग सवारी का इंतजार कर रहे थे।
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