बीती रात महोली इलाके में कांबिंग करती वन विभाग की टीम।
महोली (सीतापुर)। 20 ट्रैप कैमरे, दो पिंजरे, गश्त करने के लिए एक जालीदार ट्रैक्टर, जाल, ड्रोन कैमरा, ट्रैंकुलाइज गन से लैस 20 टीमों में विशेषज्ञों समेत शामिल 40 अधिकारी व कर्मचारी। इसके बाद भी 11 दिनों से बाघ का सुराग लगा पाने में नाकामी हाथ लगी। इस बीच वन विभाग के सारे तामझाम को चकमा देकर बाघ ने रविवार की रात सीतारामपुर के पास खेत में बंधे पड़वा को निवाला बना लिया।
वहां से महज 70 मीटर दूर कैंप में टीम सोती रही और उसे बाघ के शिकार करने की भनक तक नहीं लग सकी। सोमवार की सुबह वन विभाग के अफसर तब बगलें झांकते नजर आए, जब पड़वा के पास लगे ट्रैप कैमरे में भी बाघ की तस्वीर नहीं मिली। रोजाना की तरह कॉम्बिंग और ग्रामीणों को जागरूक करने में एक और दिन बीत गया। वहीं, बाघ की चहलकदमी दो किमी दायरे में फिर सामने आने से दहशत बढ़ गई है। नरनी में युवक का शिकार कर मौत के घाट उतारने के बाद वन विभाग बाघ के खीरी की ओर चले जाने का दावा करने लगा था। पांच किमी के दायरे में बाघ की मूवमेंट न मिलने का दावा भी वन विभाग के अफसर कर रहे थे। अब बाघ के रविवार की रात पड़वा का शिकार करने से यह बात साफ हो गई है कि वह नरनी के आसपास ही पांच किमी के उसी दायरे में घूम रहा है, जिसमें वन विभाग का लाव-लश्कर उसे तलाश रहा है।
बाघ को शिकार करने का लालच देने के लिए तीन अलग-अलग जगहों पर पड़वा भी बांधे गए हैं। उस जगह ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इस बीच रविवार की रात नरनी से करीब दो किमी दूर सीतारामपुर के निकट खेत में बांधे गए एक पड़वा का बाघ ने शिकार किया। खेत में एक किसान के पक्के मकान में वन विभाग ने कैंप बनाया है।
बांधे गए पड़वा से करीब 70 मीटर दूर कैंप में मौजूद वन विभाग की टीम को बाघ के आने और शिकार कर पड़वा को लगभग 200 मीटर तक खींच ले जाने की भनक तक नहीं लग सकी।
सोमवार की सुबह पसिगवां गांव के निकट गन्ने के खेत में पड़वा का क्षत-विक्षत शव मिला। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पड़वा के पास लगाए गए ट्रैप कैमरे में बाघ कैद नहीं हो सका है। हांलाकि, इसकी वजह कोई अधिकारी बताने को तैयार नहीं है।