रेउसा (सीतापुर)। मानसून आने में भले अभी कुछ समय बचा है, लेकिन सरयू की तलहटी में बसे कई गांवों के लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा है। बाढ़ आई तो हालात बिगड़ने पर सिर छिपाने के लिए जगह तलाश रहे हैं। कोई नाव की मरम्मत कर रहा है तो कई लोग अपना अस्थायी ठिकाना बनाने के लिए छप्पर तैयार कर रहे हैं।
जिले के बिसवां, महमूदाबाद व लहरपुर तहसील इलाकों में हर साल बारिश के सीजन में बाढ़ आती है। बाढ़ की चपेट में सैकड़ों गांव आने से बड़ी संख्या में लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेना पड़ता है। ऐसे में कई ग्रामीण सड़कों के किनारे भी अस्थायी ठिकाना बनाते हैं। मानसून के जल्द आने की संभावना है। इसलिए तराई के ग्रामीण अभी से सुरक्षित जगहों पर आशियाना बनाने में जुट गए हैं।
बृहस्पतिवार को चहलारी के राजेश लोधी और रवींद्र आदि सीतापुर-बहराइच मार्ग के किनारे छप्पर बना रहे थे। उन्होंने बताया कि हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलते हैं। गोलोक कोडर के सभी मजरे बाढ़ से प्रभावित होते हैं। घरों में पानी भर जाता है।
उन्होंने बताया कि बाढ़ के समय काफी लोग सड़क के किनारे अपना अस्थायी आशियाना बनाते हैं। उस समय जगह की दिक्कत हो जाती है। जल्दबाजी में कोई व्यवस्था नहीं हो पाती फिर परेशानी उठानी पड़ती है। अभी ठिकाना बना लेंगे तो बाढ़ आने पर ज्यादा मुश्किल नहीं उठानी पड़ेगी। गृहस्थी भी सुरक्षित रहेगी। ग्रामीणों ने बताया कि अभी संभावित बाढ़ में काफी समय है लेकिन पहले से तैयारी कर लेंगे तो समस्याओं से जूझना नहीं पड़ेगा।