बौर क्षेत्र में कटान करती नदी।
- फोटो : बौर क्षेत्र में कटान करती नदी।
रामपुर मथुरा। कटान करतीं सरयू की लहरें सुंदरपुरवा का अस्तित्व मिटाने को बेताब हैं। यहां सिर्फ तीन घर बचे हैं। इन घरों से नदी महज ढाई मीटर दूर है। अगर ये तीन मकान सरयू में समाए तो सुंदरपुरवा का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इससे पहले लोधनपुरवा का अस्तित्व सरयू मिटा चुकी है। सोमवार को करीब छह बीघा कृषि योग्य जमीन कटकर सरयू में बह गई। गिरिजापुरी के तीनों बैराजों से सोमवार को 2.37 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रविवार की तुलना में 88 हजार क्यूसेक पानी कम डिस्चार्ज किया गया है।
अंगरौरा में लगे मीटर गेज से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को सरयू नदी का जलस्तर 20 सेमी घटकर 118 मीटर पर पहुंच गया। लेखपाल रवीन्द्र ने बताया कि खतरे के निशान से पानी एक मीटर नीचे है। इससे कटान की गति धीमी हुई है। शुकुलपुरवा के प्रधान श्रीराम ने बताया कि कटान धीमा पड़ने से राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन अभी सरयू का रौद्र रूप खेतों को निगल रहा है। पिछले 24 घंटे में सुंदरपुरवा के सियाराम, परिक्रमा व श्रीपाल की छह बीघा फसल समेत खेत कटकर सरयू में बह गए हैं। बेकाबू लहरें जमीन का कटान करती हुई सुंदरपुरवा में बचे तीन मकानों की ओर बढ़ रही हैं। यहां शेष तीन घरों से नदी सिर्फ ढ़ाई मीटर दूर है। इन परिवारों ने गृहस्थी समेटकर घर खाली कर दिए हैं। यदि यह तीनों मकान भी कटान की भेंट चढ़ गए तो सुंदरपुरवा का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इससे पहले सरयू की लहरें लोधनपुरवा के सभी 28 घर काटकर उसका अस्तित्व खत्म कर चुकी हैं।
फसलों के नुकसान का सता रहा डर
चौका नदी में आई बाढ़ से करीब 700 बीघा फसलें डूबी हैं। चार दिन से खेतों में पानी भरा होने के कारण फसलें सड़ने का खतरा बढ़ गया है। भिखारीपुर मार्ग पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन प्रभावित है। बाढ़ के पानी से घिरे 20 गांवों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी बना हुआ है। राजकुमार ने बताया कि 20 बीघा धान की फसल पकने वाली है। बाढ़ का पानी चार दिन से खेत में भरा है। ऐसे में फसल खराब हुई तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। उमेश ने बताया कि खेत ज्यादा नीचे होने के कारण पानी निकलने का रास्ता नहीं है। अब धूप निकलने से फसल सड़ने का डर है। रामकिशोर, मुकेश व हरिराम ने बताया कि बांसुरा से भिखारीपुर मार्ग पर बाढ़ का पानी कई दिनों से भरा है। गांव के आसपास खेत व खाली जमीन भी बाढ़ की चपेट में हैं। जलभराव से मच्छरों की भरमार हो गई है। संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ने लगा है।
कटान पीड़ितों को मिलेगा आवासीय पट्टा
सरयू नदी जलस्तर कम हो रहा है। चौका नदी का पानी पहले की अपेक्षा कुछ बढ़ा है। अभी नुकसान की स्थिति नहीं है। बाढ़ व कटान पीड़ितों की सभी समस्याओं का निदान किया जा रहा है। जिन लोगों के घर कटे हैं उन्हें आवासीय पट्टा दिलाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद