महोली (सीतापुर)। बाधिन को पकड़े जाने के बाद जहां वन विभाग अन्य बाघों की तलाश में जुटा है। वहीं, क्षेत्र में बाघिन के शावकों सहित चार से पांच अन्य बाघों की मौजूदगी बताते हुए ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग बाघिन को पकड़ने का दावा कर रहा है, लेकिन क्षेत्र में अभी मौजूद बाघों के कुनबे की वजह से इलाके के बाशिंदे भयभीत हैं। नरनी गांव में किसान को निवाला बनाने के 30 दिन बाद गत शनिवार बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया गया है लेकिन उसके साथ देखे गए शावक वन विभाग व ग्रामीणों के लिए मुसीबत बने हैं।
नरनी गांव के ग्रामीण दीपक कुमार दीक्षित व कमलेश बंसल ने बताया कि वन विभाग बाघिन को पकड़ने का दावा कर रहा है लेकिन उसके साथ देखे गए दो शावक अभी भी आसपास ही मौजूद हैं। उनके उग्र होने की आशंका से ग्रामीणों में भय है। ग्रामीण अनुराग व परशुराम मिश्रा ने बताया कि इलाके में एक नहीं कई बाघ मौजूद हैं। वन विभाग ने सोमवार को शावकों को पकड़ने के लिए दो जगह पिंजरा लगाया है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार इसी इलाके में शावकों के पगचिह्न मिल रहे हैं लेकिन वह पिंजरे में कैद नहीं हो रहे हैं।
संदीप दीक्षित व राहुल ने बताया कि वन विभाग द्वारा ही कहा गया था कि तीन से चार बाघ हैं। अगर बाघिन पकड़ी गई है तो अब बाघिन को न पाकर उनके शावक उग्र होकर कभी भी किसी पर हमला कर सकते हैं। अभी भी कैंप कार्यालय से 400 मीटर के दायरे में बाघ के पगचिह्न मिल रहे हैं। वन विभाग की टीम पिंजरा, ड्रोन व ट्रैप कैमरा से शावकों की तलाश कर रही है।
किसान डर से खेतों में नहीं जा रहे
ग्रामीण रोहित गुप्ता ने बताया कि जिस इलाके से बाघिन को पकड़ा जाना बताया गया है, उस तरफ आने-जाने में पाबंदी लगाई गई है। वन विभाग ने इस इलाके में एक पिंजरा भी लगाया है। नरनी, श्याम जीरा, कटिघरा, जगन्नाथपुर, रघुबर दयालपुर आदि गांव के किसानों की फसलें से बर्बाद हो रही हैं। किसान डर की वजह से खेतों में नहीं जा रहे हैं। वही डब्ल्यूटीआई की टीम गांव-गांव जाकर बाघ की गतिविधियों व बचाव के तौर तरीके बताते हुए लोगों को जागरूक कर रही है।