सीतापुर। सहकारी समितियों में जन औषधि केंद्र खोने जाने की योजना अधर में है। 2023 से इसकी कवायद चल रही है। इसके पीछे मंशा थी कि किसानों को स्थानीय स्तर पर ही सस्ती दवाएं मिल सकें। यह योजना अमली जामा नहीं पहन पा रही है। अभी तक समितियों में एक भी जन औषधि केंद्र नहीं खुल सके हैं।
किसानों को सस्ती दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र खोले जाने थे। इसके लिए 12 सहकारी समितियों को 2023 में चिह्नित किया गया था। इन्हीं समितियों में जन औषधि केंद्र खोले जाने थे। पंजीकरण के लिए नौ समितियों ने ऑनलाइन आवेदन किए। इसमें से छह समितियां लाइसेंस के मानकों पर खरी पाई गईं। इन समितियों को लाइसेंस बनवाने के लिए हरी झंडी दे दी गई।
ड्रग लाइसेंस मिलने के बाद ही संबंधित समिति जन औषधि केंद्र खोल सकती हैं। एक समिति ने निवेश मित्र पोर्टल पर आवेदन किया। दो समितियां तय फीस नहीं जमा कर सकीं। जबकि अन्य दो समितियों का ब्योरा जांच में मिलान नहीं हो सका। इसीलिए किसी भी समिति का ड्रग लाइसेंस नहीं बन सका है।
जिन उद्देश्यों के लिए जन औषधि केंद्र खोले जाने थे, वह पूरे नहीं हो रहे हैं। विभाग की लापरवाही से जन औषधि केंद्रों का संचालन नहीं हो रहा है। सहायक जिला निबंधक सहकारिता नवीन चंद्र शुक्ला ने बताया कि समस्या का समाधान कराकर जन औषधि केंद्र शीघ्र संचालित कराए जाएंगे।