सीतापुर। पोषण वाटिका केवल सब्जियां उगाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पोषण व संवेदनशील कृषि का प्रभावी मॉडल है। इसके माध्यम से परिवार को वर्षभर विटामिन ए, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, जिंक, प्रोटीन एवं एंटी ऑक्सीडेंट युक्त ताजी एवं सुरक्षित सब्जियां व फल उपलब्ध कराए जा सकते हैं। यह जानकारी पोषण वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने बिसवां ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय सरैंया माफी में दी।
वह कृषि विज्ञान केंद्र कटिया द्वारा खेत बचाओ अभियान के तहत पोषण वाटिका की स्थापना द्वारा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा और कृषि आधारित महिला उद्यमिता विषय पर प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम को संबाेधित कर रही थीं। डॉ. रीमा ने बताया कि प्रत्येक परिवार को अपनी पोषण वाटिका में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी सब्जियां, फलदार पौधे तथा औषधीय पौधों का समावेश करना चाहिए, जिससे परिवार की आहार विविधता एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने महिलाओं को जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि के अंतर्गत जैविक खेती, वर्षा जल संरक्षण, मल्चिंग, रसोई अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और वर्मी कंपोस्ट उत्पादन जैसी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में कृषि सखी रेनू, अल्का एवं ग्राम की महिला किसान, स्वयं सहायता समूहों की सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने सहभागिता की।
रसोई और कृषि अपशिष्ट से बनाएं खाद
रसोई एवं कृषि अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन करके उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार की जा सकती है। जिससे मृदा स्वास्थ्य, कार्बनिक पदार्थों की मात्रा एवं लाभकारी सूक्ष्मजीवों में वृद्धि होती है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मशरूम उत्पादन को कम लागत एवं उच्च आय वाला कृषि उद्यम बताते हुए इसके वैज्ञानिक उत्पादन, स्वच्छता, विपणन व मूल्य संवर्धन की जानकारी दी गई। साथ ही वर्मी कंपोस्ट निर्माण, जैविक कीटनाशकों की तैयारी, किचन वेस्ट कम्पोस्टिंग, घरेलू स्तर पर पोषक अनाज एवं सब्जियों का प्रसंस्करण, महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार एवं उद्यमिता विकास पर भी जानकारी प्रदान की गई।