संदना। बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग अब रणनीति में बदलाव करने जा रहा है। रसुलवा में बाघिन ने जिस जगह किसान पर हमला कर मौत के घाट उतारा था, वहां लगा पिंजरा अब दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। रविवार को दिनभर कॉम्बिंग के बाद बाघिन का कोई सुराग न मिलने पर वन विभाग ने यह निर्णय लिया है। किसान की मौत के 11 दिन बाद भी बाघिन को पकड़ने में नाकाम वन विभाग के प्रति ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
किसान कमल किशोर की बाघिन के हमले में मौत होने के बाद वन विभाग का रेस्क्यू अभियान रविवार को 11वें दिन भी जारी रहा, लेकिन बाघिन का कोई सुराग नहीं मिला। दिनभर चली कॉम्बिंग के बावजूद न तो ताजा पगचिह्न मिले और न बाघिन किसी ट्रैप कैमरे में कैद ही हुई।
लगातार 11 दिनों से चल रहे अभियान के बाद भी वन विभाग के हाथ खाली हैं। विभाग की टीमों ने रविवार को गेंधारिया, बीजुआमऊ, शेरपुर, रसूलवा व उपरहितापुर समेत आसपास के खेतों, बागों व जंगल के किनारे सघन तलाशी अभियान चलाया। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की, लेकिन बाघिन की मौजूदगी का कोई नया प्रमाण नहीं मिला।
वन विभाग अब अपनी रणनीति में बदलाव की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार जिस स्थान पर किसान पर हमला हुआ था, वहां लगाए गए पिंजरे को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की तैयारी है, जिससे बाघिन की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्र में उसे ट्रैप किया जा सके।
उधर, बाघिन की दहशत का असर ग्रामीणों की दिनचर्या पर साफ दिखाई दे रहा है। बीजुआमऊ निवासी किसान रामकुमार ने बताया कि डर के मारे खेतों की तरफ जाने की हिम्मत नहीं हो रही है। खेती-बाड़ी बाधित है। किसान कमता ने बताया कि जानवरों के लिए चारा लेने जाना मुश्किल हो गया है। इससे मवेशियों को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है।
बाघिन की दहशत के कारण क्षेत्र के लोगों की दिनचर्या सामान्य नहीं हो पा रही है। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने तथा बाघिन दिखाई देने या उसके संबंध में कोई सूचना मिलने पर तत्काल विभाग को अवगत कराने की अपील की है।