प्रधानी चुनाव की सरगर्मी चल रही थी। इसी बीच 25 जून 2015 को मौजूदा प्रधान हरिवंश सिंह व दूसरे प्रधान प्रत्याशी जीतेंन्द्र मिश्रा के बीच वर्चस्व की जंग को लेकर पुलिस चौकी के अंदर ताबड़तोड़ गोलियां चली थी। जिसमें जितेंद्र मिश्रा समेत एक ही पक्ष के तीन लोगों की मौत व चार लोग घायल हुए थे। इस मामले ने तूल पकड़ा था।
केस दो
पिछले प्रधानी चुनाव के तीन दिन पूर्व 28 नवंबर को मूड़ा हूसा ग्राम सभा में मौजूदा प्रधान शांति देवी के पति संतराम व प्रधान प्रत्याशी मुन्ना लाल के बीच वोट मांगने को लेकर हुए विवाद में मारपीट के बाद गोली चली थी। जिसमें गोली लगने से एक व्यक्ति घायल हुआ था। मारपीट में कई लोग जख्मी हुए थे। दोनों पक्षों ने मुकदमा पंजीकृत कराया था।
केस तीन
हरगांव थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर में वर्तमान प्रधान कमलेश मौर्य व प्रधान प्रत्याशी पुष्पेन्द्र सिंह के बीच 11 अगस्त 2020 को मारपीट व फायरिंग की घटना हुयी थी। प्रधान कमलेश मौर्य द्वारा प्रधान प्रत्याशी पुष्पेन्द्र सिंह की कार तोड़ दी गई और महिलाओं को घर में घुसकर मारा पीटा गया। कमलेश मौर्य टॉप टेन अपराधी है। प्रधान के भाई राजेन्द्र व सहयोगी अंशू को जेल भेजने की कार्रवाई की गयी है।
सीतापुर। ये केस महज बानगी भर हैं। इसके अलावा जिले में ऐसे और भी मामले सामने आ चुके हैं। शहर कोतवाली क्षेत्र के पकरिया गांव में चुनावी रंजिश में वर्तमान प्रधान कुन्ती देवी के पति कल्लू शर्मा की धारदार हथियार से एक जुलाई 2020 को हत्या की गयी थी। सभी आरोपी पूर्व प्रधान कृष्ण गोपाल व दूसरे पूर्व प्रधान के पुत्र रवी प्रकाश, प्रेम प्रकाश जेल में बंद हैं। यह घटना चुनावी रंजिश का रूप ही बताई जा रही है।
पंचायत चुनाव की आहट शुरू हो गई है। गांव की सियासत तेज हो गई है। पंचायत चुनाव की तारीख अभी भले ही न निकली हो, प्रधानी की टशन उभरकर सतह पर आ रही है। गांव की सियासत खूनी संघर्ष का रूप ले रही है। हरगांव के सुल्तानपुर की घटना हो या महोली में दो पक्षों की फौजदारी। ऐसे खूनी संघर्ष के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं, जिनके पीछे कहीं न कहीं प्रधानी की चुनावी रंजिश छुपी हुई है।
सूत्रों की माने तो गांव में अब खेत, नाली, पानी से जुड़े विवादों के पीछे कहीं न कहीं प्रधानी चुनाव कि रंजिश है। प्रधानी जीतने के ख्वाब देखने वाले अपने प्रतिद्वंद्वियों को नीचा दिखाने के लिए पॉलिटिक्स खेल रहे हैं। शायद यही वजह है कि पंचायत चुनाव के दौरान झगड़ों के मामले बढ़ने लग जाते हैं।
गांव में सजने लगी राजनीति की चौपाल
प्रधानी चुनाव को लेकर अभी दूर-दूर तक कहीं तारीख तय नहीं हुई है। इसके बाद भी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने वाले लोगों ने पॉलिटिक्स शुरू कर दी है। जिसके चलते गांव में सियासी सूरमाओं की चौपाल में सजने लगी हैं। लोगों ने वोटरों को लुभाने के लिए गठजोड़ शुरू कर दिया है। उन्हें तरह-तरह के लुभावने ख्वाब दिखाए जाने लगे हैं।