सीतापुर। जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के टेंडर आवंटन में वित्तीय बोली में क्वालीफाई फर्मों के दस्तावेज शर्ताें के अनुरूप नहीं निकल रहे हैं। गोंडा निवासी फर्म मालिक का चरित्र प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद टेंडर पर संकट छा गया है। वित्तीय बोली में क्वालीफाई दो अन्य फर्माें के दस्तावेज में कमी निकली है। इन दोनों फर्मों ने भी निविदा की शर्तों के अनुरूप अनुभव प्रमाणपत्र नहीं लगाया है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में उपहार सामग्री की आपूर्ति के लिए वित्तीय बोली में कुल तीन फर्में क्वालीफाई हुईं। इसमें एल 1 फर्म के मालिक का चरित्र प्रमाणपत्र डीएम गोंडा ने निरस्त कर दिया। साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों व फर्म मालिक के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति कर दी है।
दूसरी एल 2 फर्म के पास सामूहिक विवाह में सामग्री के स्थान पर सिर्फ खाने-पीने व टेंट प्रबंधन का अनुभव है। सूत्रों के अनुसार इस फर्म के पास केंद्र या राज्य सरकार के विभाग में सामग्री आपूर्ति का तीन वर्षों का कोई अनुभव नहीं है, जबकि निविदा की शर्त नंबर 11 के अनुसार फर्म के पास मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में सामग्री आपूर्ति का तीन वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है।
वहीं, निविदादाता के पास सरकारी, अर्द्धसरकारी विभाग में समान सामग्री आपूर्ति का अनुभव होना चाहिए। इसी तरह तीसरी चयनित एल 3 फर्म ने नेशनल फेडरेशन ऑफ फॉर्मर्स प्रॉक्योरमेंट प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कॉपरेटिव्स ऑफ इंडिया लिमिटेड का अनुभव प्रमाणपत्र लगाया है। यह केंद्र या राज्य सरकार की कोई संस्था या विभाग नहीं है।
ऐसे में यह अनुभव प्रमाणपत्र निविदा की शर्ताें के अनुरूप नहीं है। वहीं, निविदा की शर्त के अनुसार पार्टनरशिप फर्म को जिलाधिकारी व बैंक दोनों के द्वारा निर्गत एक करोड़ का हैसियत प्रमाणपत्र फर्म के नाम होना अनिवार्य है।
यह फर्म दो भाइयों के नाम से है। इनमें एक पार्टनर का हैसियत प्रमाणपत्र एक करोड़ पंद्रह लाख तीस हजार का है, जबकि दूसरे पार्टनर का मात्र सोलह लाख रुपये का हैसियत प्रमाणपत्र है, जो शर्ताें के अनुसार मान्य नहीं होना चाहिए।
इन तीनों फर्मोें को वित्तीय बोली में क्वालीफाई किया गया है, जबकि तीनों फर्में किसी न किसी दस्तावेज में पिछड़ रही हैं। ऐसे में टेंडर पर संकट के बादल छा गए हैं।
लगातार कार्रवाई के बावजूद जिला समाज कल्याण अधिकारी चुप
जिला समाज कल्याण अधिकारी मोतीलाल यादव के मोबाइल पर लगातार कॉल व मेसेज किया गया। चरित्र प्रमाणपत्र निरस्त होने के साथ अन्य फर्मों के दस्तावेज में कमी के संबंध में सवाल पूछने के लिए मेसेज भेजा गया। उन्होंने चुप्पी साध रखी है। ऐसे में उनकी टेंडर चयन प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। उनके गोंडा कनेक्शन की चर्चाएं भी तेज हैं। चर्चा है कि आखिर गलत चरित्र प्रमाणपत्र व त्रुटिपूर्ण दस्तावेज वाली फर्माें की सही ढंग से जांच क्यों नहीं की गई। चर्चा है कि मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना का टेंडर बेहद लापरवाही से आवंटित किया गया।