सीतापुर। तहसील सदर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। नायब तहसीलदार कोर्ट में महिला की मौत के एक वर्ष बाद उनके नाम से बेशकीमती जमीन का दाखिल खारिज हो गई। खास बात यह रही कि इस मामले में मृत महिला के नाम से प्रार्थना पत्र दिया गया। उसमें हस्ताक्षर के स्थान पर मृत महिला का अंगूठा लगा था। पूर्व यह मामला अदम पैरवी में निरस्त कर दिया गया। इसके चौबीस दिन बाद केस को रिस्टोर कर मामलेकी सुनवाई की गई।
एक माह तक सुनवाई के बाद दाखिल खारिज का आदेश पारित कर दिया गया। इस दौरान प्रभारी नायब तहसीलदार व तहसीलदार दोनों की जिम्मेदारी डॉ अतुल सेन सिंह के पास रही। इस मामले में डीएम ने जांच के आदेश दिये हैं। भगवानपुर निवासी प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने तहसीलदार सदर डॉ अतुल सेन सिंह द्वारा किए गए एक मामले की शिकायत डीएम से की थी। इसमें बताया कि मिश्रिख के बरगदहा गांव निवासी जगदेई की मृत्यु 27 अक्तूबर 2023 को हो गई।
22 मई 2024 को ग्राम पंचायत अधिकारी ने परिवार रजिस्टर के प्रपत्र में उन्हें मृत घोषित कर दिया। 5 जून 2024 को तहसील मिश्रिख से जगरानी का मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो गया। इसके बावजूद 15 अक्तूबर 2024 को मृतका जगरानी का अंगूठा लगा एक प्रार्थना पत्र धारा 34 के तहत तहसीलदार न्यायालय में दिया गया।
इसमें अहाता कप्तान हबीबनगर की गाटा संख्या 39 के 423.93 वर्ग फीट बेशकीमती प्लाट की दाखिल खारिज का अनुरोध किया गया। इस प्लाट को जगरानी ने 26 मार्च 2012 को खरीदा था। इस प्रार्थना पत्र के बाद योजित हुए वाद की सुनवाई तात्कालिक तहसीलदार व नायब तहसीलदार डॉ अतुल सेन सिंह ने की। तहसीलदार के रूप में उन्होंने यह वाद नायब तहसीलदार की कोर्ट में हस्तांतरित कर दिया। इसके बाद यह वाद अदम पैरवी में 2 दिसंबर 2024 को निरस्त हो गया।
26 दिसंबर को मृतका जगरानी का अंगूठा लगा एक प्रार्थना पत्र नायब तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इसमें निरस्तीकरण आदेश के खिलाफ एक वाद दाखिल किया गया। इस पर डॉ अतुल सेन सिंह ने नायब तहसीलदार के रूप में मूल पत्रावली तलब करते हुए मामले की सुनवाई की। इसमें मृतका जगरानी पक्ष की उपस्थिति प्रमाणित करते हुए 30 जनवरी को दाखिल खारिज का आदेश पारित कर दिया।