नैमिषारण्य (सीतापुर)। बोल कड़ाकड़ सीताराम, जय-जय राम, जय-जय राधेश्याम के नारे से पूरा नैमिषारण्य क्षेत्र गूंजायमान हो उठा। हर तरफ आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि मानो श्रद्धालुओं को किसी ने नैमिषारण्य में बुलाया हो। वह कंक्रीट के पथरीले रास्तों पर जय जय राम कहते हुए आस्था में लीन रहे। कोई गोद में बच्चे को बिठाकर आस्था के पथ बढ़ता हुआ जा रहा था तो कोई डंडे के सहारे 84 कोसी परिक्रमा के मार्ग पर चल पड़ा था। सुबह तीन बजे से शुरू हुआ श्रद्धालुओं का सैलाब दिनभर पहले पड़ाव पर गुजरता रहा। कुछ इस तरह के दृश्य 84 कोसी परिक्रमा में पहले दिन दिखाई दिए।
84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत रविवार सुबह करीब चार बजे पहला आश्रम के महंत भरतदास ने डंका बजाकर की। पहले चक्रतीर्थ पर पूजन अर्चन किया। उसके बाद मां ललिता देवी मंदिर चौराहे पर पहुंचकर विधिवत शुरुआत की। पहली मर्तबा ऐसा मनोरम और विहंगम दृश्य दिखाई दिया, जब महंत गाजे-बाजे के साथ रथ पर सवार होकर निकले। आगे-आगे बैंड बाजा, ध्वज लिए हुए बालक परिक्रमा की शोभा बढ़ा रहे थे। श्रद्धालु सुबह तीन बजे से ही चौराहे पर एकत्र होकर रथ आने का इंतजार कर रहे थे। एसडीएम गिरीश झा, सीओ महेंद्र प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर नैमिषारण्य विनोद मिश्रा, इंस्पेक्टर मिश्रिख मनोज यादव व ईओ आरपी सिंह काफी उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे थे।
इंस्पेक्टर विनोद मिश्र महंत को लेकर जैसे ही चौराहे पर पहुंचे, मानो श्रद्धालुओं में जोश आ गया। सब जोर-जोर से बोल कड़ाकड़ सीताराम के जयकारे लगाने लगे। हर आंखें बस रथ को ही निहार रही थी। महंत का माल्यार्पण कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए हर कोई आतुर दिखा। किसी की मनोकामना पूर्ण हुई तो कोई भीड़भाड़ की वजह से महंत तक पहुंच नहीं सका।
चौराहे पर ढोल नगाड़ों की ध्वनि पर जैसे ही रथ पहुंचा सबसे पहले पुलिस कर्मियों ने महंत को फूल मालाओं से लाद दिया। उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लिया। उस समय पुलिस कर्मियों में महंत का स्वागत करने की होड़ मच गई। सीओ से लेकर होमगार्ड तक महंत से आशीर्वाद की चाह लगाए हुए थे।
महंत रथ से उतरकर चौराहे पर पहुंचे तो एसडीएम सहित अन्य अफसरों ने उनका भव्य तरीके से माल्यार्पण किया। पुष्प वर्षा की, चंदन का टीका लगाया। उसके बाद महंत का रथ पहले पड़ाव कोरौना की ओर कूच कर गया। महंत कुछ दूरी तक पूरी सुरक्षा के बीच चलते रहे। आगे चलकर रथ वापस चला आया, लेकिन श्रद्धालुओं का पहले पड़ाव पर पहुंचने का शुरू हुआ सिलसिला दिनभर जारी रहा।
श्रद्धालु के आगे बौने साबित हुए पथरीले मार्ग
कोई डंडे के सहारे अपनी परिक्रमा कर रहा था, तो कोई अपने बच्चों को कंधों पर बैठाकर परिक्रमा कर रहा था। कई ऐसे लोग भी दिखाई दिए जो अपनी जिंदगी में 40वीं बार यात्रा कर रहे थे। आस्था में लोग इस कदर डूबे हुए दिखाई दिए कि बीमार होने के बावजूद परिक्रमा में शामिल हुए। पैरों में दिक्कत होने के बावजूद आस्था नहीं तोड़ी। परिक्रमा के पथरीले मार्ग भी आस्था के आगे बौने साबित हुए। श्रद्धालुओं को कोई खाने-पीने की दिक्कत न हो, इसके लिए लोगों ने उनके स्वागत में अपना योगदान दिया।
परिक्रमा मार्ग पर तमाम लोग श्रद्धालुओं को चाय नाश्ता, पकौड़ी खिलाते रहे। अगर किसी को थकावट होती तो उनके लिए रास्ते में पलंग का भी इंतजाम था। कोरौना पहुंचकर श्रद्धालुओं ने डेरा जमाया। ढोल नगाड़ों की ध्वनि से पूरा कोरौना गूंजायमान रहा। इस परिक्रमा में मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तरांचल, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों समेत पड़ोसी देश नेपाल व भूटान के भी श्रद्धालु दिखाई दिए।