सरकारी डिग्री कॉलेजों में इस बार एडमिशन को लेकर मारामारी मच सकती है। कारण, जिले में राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में महज पांच हजार सीटें ही हैं। जबकि इस बार इंटर में 30427 विद्यार्थी पास हुए हैं।
हालांकि वित्तविहीन महाविद्यालयों में 35 हजार सीटें हैं लेकिन हर बार की तरह इस बार भी लोगों की पहली पसंद सरकारी महाविद्यालय ही हैं। ऐसे में एक सीट पर कई-कई दावेदार नजर आ रहे हैं।
जनपद के महाविद्यालयों के विभिन्न कोर्साें में सीटों की कमी नहीं है। लेकिन सुविधा की लिहाज से विद्यार्थियों की पहली पसंद राजकीय व अनुदानित कॉलेज हैं। इस बार 30427 विद्यार्थियों ने इंटर की परीक्षा पास की है।
उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थी महाविद्यालयों में एडमिशन को लेकर गणित लगा रहे हैं। कोई मेडिकल क्षेत्र में जाना चाहता है तो कोई इंजीनियर व प्रशासनिक सेवा में अपना दमखम दिखाना चाहता है।
जनपद में दो राजकीय महाविद्यालय हैं। जिनमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाविद्यालय खैराबाद व फखरुद्दीन अली अहमद स्नातकोत्तर महाविद्यालय महमूदाबाद है। इसी प्रकार अनुदानित महाविद्यालयों में आरएमपी डिग्री कॉलेज, हिंदू कन्या महाविद्यालय व सिधौली का गांधी पीजी कॉलेज है।
इन कॉलेजों में बीए, बीएससी, बीकॉम की करीब पांच हजार सीटें है। जबकि इस बार इंटर में 30 हजार 427 विद्यार्थी पास हुए हैं। इन विद्यार्थियों की पहली पसंद ये महाविद्यालय हैं। ऐसे में यहां पर सीटों की लिहाज से काफी मारामारी होगी।
जबकि जनपद में 75 वित्तविहीन महाविद्यालय हैं। इन महाविद्यालयों में 35 हजार के करीब बीए, बीएससी, बीकॉम की सीटें हैं। ऐसे में जनपद में सीटों की कमी नहीं है, लेकिन सरकारी कॉलेजों में सीटें की कमी आड़े आएगी।
राजकीय व अनुदानित पहली पसंद
विद्यार्थियों का कहना है जनपद में सिर्फ पांच ही सरकारी व अनुदानित कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में बहुत सुविधा मिलती है। एक तो यहां पर प्रशिक्षित शिक्षक हैं दूसरे यहां पर छात्रवृत्ति आसानी से मिल जाती है। फीस भी बहुत कम है। मेरिट से एडमिशन हो जाता है। इससे कोई दिक्कत नहीं आती है। वही वित्तविहीन महाविद्यालयों में सीटें तो बहुत है लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। यहां पर शिक्षक नहीं है उस पर से फीस अधिक छात्रवृत्ति की कोई गारंटी नहीं है। इसके कारण यहां पर बहुत कम ही विद्यार्थी एडमिशन लेना चाहते हैं।
महाविद्यालय में रिक्त रह गई थी
पिछले बरस वित्तविहीन महाविद्यालयों में करीब तीन हजार सीटें रिक्त रह गई थी। इन महाविद्यालयों ने अगस्त माह तक एडमिशन प्रक्रिया चलाई थी। महाविद्यालय का खूब प्रचार प्रसार किया, इसके बावजूद विद्यार्थी एडमिशन लेने नहीं आए। इस बार भी कुछ ऐसी ही हालात रहने की उम्मीद है।