महमूदाबाद (सीतापुर)। दि किसान सहकारी चीनी मिल के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाए जाने की मांग को लेकर हड़ताल कर दी। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से करीब 20 घंटे तक चीनी मिल बंद रहा। माना जा रहा है कि इस बंदी से मिल का लाखों का नुकसान हुआ है।
मिल के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने पेराई सत्र शुरू होने के समय मिल के प्रधान प्रबंधक केपी शुक्ल से वेतन बढ़ाए जाने को लेकर वार्ता की थी। इसके चलते मिल प्रशासन के आश्वासन के बाद करीब दो माह बीत जाने पर भी वेतन वृद्धि न किए जाने से नाराज चीनी मिल के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया जिसके बाद कर्मचारियों ने मंगलवार दोपहर से हड़ताल शुरू कर दी। इससे करीब बीस घंटे मिल में पेराई का कार्य बंद रहा।
मिल यार्ड में सैकड़ों की संख्या में गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ आए किसान भी हड़ताल से परेशान रहे। मिल बंद होने से लाखों का घाटा होने का अनुमान है। मिल बंद होने के बाद हड़ताली कर्मचारी रमेश चंद्र ने बताया कि वह वर्ष 1993 से 28 रुपए दैनिक वेतन पर कार्य कर रहा है। अब उसे 194 रुपये मजदूरी मिल रही है जबकि जो मजदूर नए व अनुभवहीन हैं और संविदा पर अभी रखे गए हैं उन्हें मिल की ओर से लगभग 15 हजार वेतन दिया जा रहा है।
दैनिक वेतन भोगी रामसनेही, सत्यनारायन, रामचंद्र, विजय, रंगीलाल, रामसेवक, लालजी व कांशीराम आदि ने बताया कि उनके ही कुछ साथी वर्ष 1991 से मजदूरी करते चले आ रहे हैं, जिन्हें हाल में ही संविदा पर रखे गए लोगों से काफी कम वेतन मिल रहा है। कर्मचारी गजराज ने बताया कि 29 दिसंबर को जीएम ने मजदूरी बढ़ाए जाने की बात कही थी। 15 जनवरी को वेतन बढ़ना तय था लेकिन अभी तक कोई हल नही निकला।
जीएम केपी शुक्ल ने बताया कि एसडीएम गिरीश झा के हस्तक्षेप से मजदूरों से वार्ता हो गई है और सभी हड़ताली कर्मचारी काम पर वापस लौट आए हैं। मजदूरों का वेतन 10 प्रतिशत बढ़ाया गया है। साथ ही जिन मजदूरों की सेवाएं दस वर्ष से ऊपर हो गई है उनके लिए न्यूनतम वेतन के लिए भी मेरे स्तर से प्रयास किये जा रहे हैं। अब कोई विवाद नहीं है। मिल में कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।