सीतापुर। मनरेगा मजदूरों को समय से मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे उनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 26 करोड़ 53 लाख 73 हजार रुपये मजदूरी अटकी है। इसका भुगतान निर्धारित समय के बाद भी नहीं किया गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ग्राम्य विकास ने संबंधित दोषी अफसर-कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का समय से भुगतान हो इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विलंबित भुगतान की समीक्षा जीरो से आठ दिवस पर की जा रही है। आयुक्त ग्राम्य विकास ने एमआईएस पर विलंबित भुगतान के प्रदर्शित आंकड़ों का परीक्षण 20 जनवरी को किया तो स्थिति सही नहीं पाई गई।
जिले में निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी 26 करोड़ 53 लाख 73 हजार रुपये मजदूरी बकाया पाई गई। 21,8,609 ट्रांजेक्शन का भुगतान विलंब की श्रेणी में है। इस संबंध में अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार ने जिला कार्यक्रम समन्वयक को निर्देश दिए हैं कि उच्चाधिकारियों द्वारा विलंबित भुगतान की समीक्षा समुचित रूप से नहीं की जा रही है।
विलंबित भुगतान के कारण मनरेगा की लोकप्रियता तथा श्रमिकों के मनोबल में लगातार ह्रास हो रहा है। जिला स्तरीय अफसरों की जवाबदेही बढ़ रही है। जिले में जिस स्तर पर मजदूरी भुगतान मेें विलंब हुआ है, उस स्तर पर संबंधित दोषी अफसर-कर्मियों पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है जिससे विलंबित भुगतान की स्थित उत्पन्न न हो।
मुख्य विकास अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि आयुक्त ग्राम्य विकास के निर्देशों का जिले में पालन कराया जाएगा। उपायुक्त श्रम रोजगार को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।