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नहरों में पानी न आने से बोआई पर संकट

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गोंदलामऊ क्षेत्र में सूखी पड़ी नहर। -संवाद - फोटो : SITAPUR
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गोंदलामऊ (सीतापुर)। किसानों की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले अतिवृष्टि से फसल की बर्बादी हुई। अब नहरों में पानी न आने से बोआई पर संकट है। इससे वह निजी संसाधन के जरिये अधिक धनराशि खर्च कर खेतों की पलेवा करने के लिए मजबूर हैं।
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किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने नहर व नलकूप की सिंचाई को माफ किया है, लेकिन किसानों को समय से इसका लाभ नहीं मिल रहा है। पहले धान की फसल खराब होने से किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो चुका है। अब गेहूं की बुआई के लिए खेतों में नमी के लिए नहरों से पानी गायब है।
तकनीकी खराबी के चलते नलकूप भी बंद पड़े हैं। ऐसी दशा में किसानों को निजी संसाधन का सहारा लेना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए गेहूं की बुआई करना कठिन काम है।
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विकासखंड गोंदलामऊ क्षेत्र के विभिन्न गांव से होते हुए निकली नहर में पानी न छोड़े जाने के कारण टेल की सीमा में आने वाले दर्जनों गांवों के किसानों को मायूस होना पड़ रहा है। इस समय किसान खेतों में पलेवा करने के लिए परेशान हैं। गेहूं की बुआई नहीं हो पा रही है। गोपालपुर पश्चिमी निवासी किसान सिद्धि कुमार शुक्ला ने बताया कि नहर में पानी न आने से किसानों को डीजल इंजन के भरोसे रहना पड़ता है।
जिससे खेती की लागत भी बढ़ जाती है। गेहूं की बुआई लेट हो रही है। जेनापुर के किसान संतोष कुमार बताते हैं, सालभर में बस एक बार ही पानी आता है। वह भी तब आता है, जब हम सिंचाई कर लेते हैं। दयाशंकर कहते हैं कि कोई सुनवाई नहीं है। बैजनाथ ने बताया कि गन्ने के खेत खाली हो रहे हैं। खेतों का पलेवा करना है।
क्षतिग्रस्त कर दीं पटरियां
मिश्रिख कैनाल में पानी न आने के कारण गोपालपुर पश्चिमी, भगता, वैसुवा व पुरैनी आदि गांवों के किसानों को मायूस होना पड़ रहा है। आमाघाट, जेनापुर जैसे गांवों के पास कुछ लोगों ने नहर की पटरियां भी क्षतिग्रस्त कर दी हैं। जिसकी वजह से टेल तक नहर का पानी नहीं पहुंच सकता है।
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