खैराबाद में अतिथि को स्मृति चिह्न देते पदाधिकारी।
खैराबाद (सीतापुर)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अल्लामा फजले हक खैराबादी ने देश को आजाद कराने के लिए फतवा जिहाद जारी किया था। आज उसी फतवा जिहाद को कुछ लोग बदनाम कर रहे हैं। बदनाम करने वालों को जेहाद फतवा का मतलब समझना चाहिए। यह बात शनिवार देर शाम तुर्कपट्टी के एक गेस्ट हाऊस में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हजरत अल्लामा फजले हक खैराबादी के संबंध में साहित्यिक एवं राजनीतिक सेमिनार में लखनऊ ऐशबाग ईदगाह के पेश इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कही।
उन्होंने कहा कि अल्लामा फजले हक ने तालीम हासिल कर अंग्रेजों के जुल्मों-सितम के आगे दिल्ली की जामा मस्जिद में जिहाद फतवा जारी कर आजादी का बिगुल फूंका था। उनके इंतकाल में देश में ही नहीं तुर्की के बादशाह ने सात दिवसीय शोक घोषित किया था। इसलिए आप बगैर तालीम के कुछ भी हासिल नहीं कर सकते हैं। सेमिनार को लखनऊ के अख्तर सुहेल, शेख अबजाल हुसेन, पूर्व ब्लाॅक प्रमुख खैराबाद अजय प्रकाश त्रिपाठी, मुफ्ती मोहम्मद आबताब आलम नदवी, शोएब मियां ने भी संबोधित किया। इस मौके पर कारी सलाउद्दीन, आयोजक नुमान शिद्दकी, हाजी रिजवान अंसारी, खलील शहनवाज, हाफिज शफीक आदि मौजूद रहे।