सीतापुर। जिले के 40 विद्यालय कौशल केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इन विद्यालयों में प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। इनमें बच्चों को पर्यावरण, ऊर्जा, कृषि व इंजीनियरिंग के गुर सिखाए जाएंगे। इस प्रयोगशाला के लिए शासन की तरफ से टूल किट उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पहले इन विद्यालयों में एक कमरा लर्निग-बाय-डूइंग कार्यक्रम के तहत तैयार किया जाएगा। इसको लेकर बीएसए ने निर्देश जारी किए है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों को कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है। पहले चरण में प्रत्येक विकासखंड से दो-दो मॉडल विद्यालय बनाए जाएंगे। इन विद्यालयों को पहले चरण में चयनित कर लिया गया है। अब यहां पर लर्निग-बाय-डूइंग कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसमें शिक्षकों द्वारा चार चरण अपनाएं जाएंगे। पहले चरण में इंजीनियरिंग एंड वर्कशाप, एनर्जी एंड एन्वायरमेंट, एग्रीकल्चर नर्सरी व होम एंड हेल्थ के विभिन्न गतिविधियों को बच्चों के साथ संपादित कराया जाएगा। प्रयोगशाला के लिए शासन स्तर से टूल किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत विद्यालय में कमरे की रंगाई-पुताई, मरम्मत, बिजली कनेक्शन आदि की व्यवस्था कंपोजिट ग्रांट से की जाएगी।
यह विद्यालय हुए चयनित
प्रत्येक ब्लॉक से दो-दो विद्यालय चयनित किए जाएंगे। प्रथम चरण के तहत एलिया विकासखंड का उच्च प्राथमिक विद्यालय भेलावाखुर्द, बिसवां का उच्च प्राथमिक विद्यालय सरैंया माफी, गोंदलामऊ का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुचलाई कंपोजिट, हरगांव विकासखंड का उच्च प्राथमिक विद्यालय बेनीराज दशरथपुर, खैराबाद विकासखंड का उच्च प्राथमिक विद्यालय बरसोईयां कंपोजिट, मछरेहटा विकासखंड का कन्या जूनियर हाईस्कूल बीहट बीरम, महमूदाबाद विकासखंड का उच्च प्राथमिक विद्यालय महमूदाबाद, सिधौली विकासखंड का उच्च प्राथमिक विद्यालय कोडरिया सहित अन्य विद्यालय शामिल हैं। पहले चरण की सफलता के बाद योजना का विस्तार किया जाएगा। इससे नौनिहालों को परिषदीय विद्यालय में पढ़ाई के साथ ही प्रयोग करने की भी सुविधा रहेगी। शिक्षक पहले प्रयोग करेंगे। उसके बाद बच्चों से करवाएंगे। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित कर निपुण किया जाएगा।
शुरू हुई कवायद
प्रधानाध्यापकों को लर्निग-बाय-डूइंग कार्यक्रम के तहत प्रयोगशाला बनाए जाने के निर्देश दिए गए है। इसपर काम तेज कर दिया गया है।
- अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए