सीतापुर। ग्रामीण अंचलों की आब-ओ-हवा बदलने लगी है। इंसानियत का जज्बा एकाएक हर तीसरे शख्स के मन में हिलोरें मारता नजर आने लगा है। किसी भी तरह की जरूरत पर ग्रामीणों के पास कई-कई मददगार आ खड़े होते हैं। किसी को नगद रकम की जरूरत हो या कोई सामग्री चाहिए। मददगार बिना कोई संकोच व देरी किए झट से जरूरत पूरी कर देते हैं। यह मददगार कोई और नहीं पंचायत चुनाव के संभावित दावेदार हैं, जिन्होंने मतदाताओं पर डोरे डालना शुरू कर दिया है।
पंचायत चुनाव की तारीख भले अभी मुकर्रर नहीं हुई हो, लेकिन मतदाता सूची पुनरीक्षण शुरू होने से दावेदारों ने सक्रियता तेज कर दी है। दरअसल, प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है। इस लिहाज से पंचायत चुनाव इसी साल के अंत तक होने की संभावनाएं जताई जा रही थीं। लेकिन कोरोना महामारी के चलते पंचायत चुनाव टल गए।
हालांकि अब राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम शुरू कर दिया है। इससे पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। संभावित उम्मीदवारों ने अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। गांव के गलियारों और चौराहों पर राम-जुहार बढ़ गई है। हर चौखट पर दस्तक देकर गिले-शिकवे मिटाए जाने लगे हैं।
भावी उम्मीदवारों व उनके समर्थकों द्वारा ग्रामीणों की पूछ-परख बढ़ गई है। आलम यह है कि जरूरतमंद ग्रामीणों की हर तरह की मदद की जा रही है। किसी की कोई समस्या सुलझानी हो या अन्य कोई सहयोग हो तत्काल मदद के लिए दावेदार तैयार रहते हैं। मतदाता यह समझ रहे हैं कि चुनावी सीजन करीब आने से ऐसा हो रहा है, लेकिन जिन ग्रामीणों को मदद मिल रही है वे मदद करने वालों को वोट देने के लिए आश्वस्त भी कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत कुर्सी के संभावित प्रधान पद के एक उम्मीदवार ने ग्रामीणों को नई साइकिल मुहैया कराई जा रही है। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने बताया भैया हमको साइकिल मिली है, इसलिए हम वोट उन्हीं को करेंगे। हालांकि ग्रामीण ने बाद में धीरे-धीरे साइकिल की रकम भी चुका देने की बात कही। कुर्सी निवासी हीरालाल, देवेंद्र, नरेंद्र, पंकज व लालता ने बताया चुनाव में भले अभी समय हो, लेकिन गांव के माहौल में चुनावी रंग घुलने लगा है।
जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत बाड़ी में प्रधान पद को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। मौजूदा प्रधान तो हर तरह की मदद के लिए तैयार ही रहते हैं। संभावित प्रत्याशी भी जरूरतमंदों की मदद को तत्पर नजर आने लगे हैं। बाड़ी के इरशाद, नफीस, इकबाल, कल्लू, रामनाथ व शहनवाज ने बताया नगद पैसे से लेकर राशन समेत हर तरह की मदद मुहैया कराई जा रही है।
सरकार ने जैसे ही मतदाता पुनरीक्षण का कार्यक्रम शुरू कराया, ग्राम पंचायत गुलरिहा की आबोहवा बदल गई। एक संभावित उम्मीदवार लखनऊ से गांव आकर ग्रामीणों को उनके मन मुताबिक कार्ययोजना पूरी कराने में मदद कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक सुबह से देर रात तक वह गांव में हर चौखट पर दस्तक देते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण अनिल, सुनील, रामखेलावन, संतोष, विनोद तथा अतुल ने बताया अब किसी भी तरह की जरूरत पड़ते ही कई मददगार तैयार रहते हैं।