सीतापुर। लहरपुर ग्राम धौरहरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवाचक पंडित अखिलेश महाराज ने नारद-भक्ति की कथा का सुंदर वर्णन किया। प्रवाचक ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक ग्रंथ नहीं, साक्षात भगवान कृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है।
उन्होंने नारद-भक्ति की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जब देवर्षि नारद ने भक्ति के पुत्र, ज्ञान और वैराग्य को वृद्ध अवस्था में अचेत पड़े देखा उन्होंने भक्ति के कष्ट दूर करने के लिए चारों वेदों और उपनिषदों का पाठ किया, लेकिन उन्हें शांति नहीं मिली। अंततः सनत कुमारों के उपदेश पर जब श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई गई, तो ज्ञान और वैराग्य पुनः चैतन्य और युवा हो गए।
अखिलेश महाराज ने कहा कि इस कलिकाल में मन की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए भागवत कथा ही सबसे सुलभ माध्यम है। उन्होंने कहा कि जहां भागवत कथा होती है, वहां साक्षात भगवान का वास होता है और दरिद्रता व शोक का नाश होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीव को परम शांति का अनुभव होता है। कार्यक्रम में शिव सागर लाल मिश्र, विद्याधर, आशाराम शुक्ल, देवाराम शुक्ल, ध्रुव दीक्षित, अंकित दीक्षित उपस्थित रहे।