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बाढ़ से बचने को बना रहे ठिकाना

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सीतापुर के तंबौर क्षेत्र में बाढ़ की आशंका से सड़क किनारे छप्पर बनाते किसान। - फोटो : SITAPUR
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रेउसा (सीतापुर)। मानसून की आहट से ही गांजर के बाशिंदों के दिल की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। बाढ़ प्रभावित इलाके में ग्रामीण संभावित खतरे के मद्देनजर ऊंची जगहों पर सिर छिपाने के लिए ठिकाना बनाने में जुट गए हैं।
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हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले यहां के ग्रामीणों के मकान व खेत जलमग्न हो जाते हैं। ऐसी दशा में डेढ़ महीने तक ग्रामीणों को गांव छोड़कर ऊंचे स्थानों पर डेरा डालना पड़ता है।
बाढ़ आने पर रेउसा क्षेत्र के परमेश्वर पुरवा, कोनी, दुर्गापुरवा, नगीनापुरवा, गार्गी पुरवा, मरैली, संबारी पुरवा, जैतहिया, पासिन पुरवा, लोध पुरवा, लालापुरवा, रामलालपुरवा, दर्जिन रेती, चौकी पुरवा, मेवड़ी छोलहा, आशाराम पुरवा आदि सैकड़ों गांव जलमग्न हो जाते हैं।
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इन गांवों के ग्रामीणों को सड़क के किनारे अथवा दूसरी ऊंची जगहों पर तिरपाल व फूस की झोपड़ी में रहना पड़ता है। सीतापुर-बहराइच मार्ग के किनारे चहलारी के करीब लल्लन और शिव नरायन शुक्रवार को छप्पर बनाने में जुटे हुए थे।
पूछने पर बोले घाघरा नदी में पानी बढ़ना शुरू हो गया है। नदी के बीच जहां टापू नजर आते थे वहां अब पानी दिखाई देने लगा है।
हालांकि अभी बाढ़ के हालात नहीं हैं। लेकिन बरसात भी करीब है। बाढ़ किसी भी वक्त आ सकती है। इसलिए पहले से ही आसरा बना लेंगे तो परिवार को सिर छिपाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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