सीतापुर। दहेज उत्पीड़न और मारपीट के करीब सात साल पुराने मामले में न्यायिक दंडाधिकारी/अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कोर्ट संख्या-2 ने सात आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादिनी और उसके पिता अपने पूर्व आरोपों से मुकर गए। दोनों ने दहेज मांगने और मारपीट किए जाने की बात से इन्कार किया।
मामला थानगांव में वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था। इसमें सूफियान, नैमूना, साहाबुद्दीन, जाकिर, आफाक, समसुद्दीन और मुजाहिर पर दहेज मांगने, पिटाई करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। विचारण के दौरान एक अन्य आरोपी अलीमुन की मृत्यु हो गई थी, जिससे उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। विचारण के दौरान अभियोजन ने सजमा और मासूम अली को गवाह के रूप में पेश किया।
सजमा ने अपने बयान में ससुराल पक्ष पर दहेज मांगने और प्रताड़ित करने के आरोपों से इन्कार कर दिया। उसने कहा कि लोगों के बहकावे में आकर पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र दिया था। वहीं, उसके पिता मासूम अली ने भी दहेज मांगने और मारपीट की घटना से इन्कार करते हुए कहा कि उनकी बेटी ने ससुराल पक्ष पर दबाव बनाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था।दोनों गवाहों के बयान से मुकर जाने पर कोर्ट ने उन्हें पक्षद्रोही घोषित कर दिया। साक्ष्य व गवाही के आधार पर न्यायालय ने अभियोजन को आरोप साबित करने में असफल पाया।