सीतापुर। जिले के सात ब्लॉकों की 46 आशाओं की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं। सीएमओ ने इन्हें अंतिम नोटिस दिया है। काम में सुधार न होने पर सेवाएं समाप्त करने की चेतावनी दी है।
स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी कही जाने वाली आशा कार्यकर्ता अपने काम में लापरवाही बरत रही हैं। इन आशाओं की लापरवाही की शिकायत जिला स्वास्थ्य शासी निकाय की बैठक में जिलाधिकारी के सामने आई थीं।
इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए सीएमओ को इनके काम की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे। समीक्षा में उजागर हुआ कि 46 आशाएं लापरवाही बरत रही हैं। इन्होंने अप्रैल से अक्तूबर माह तक एक भी प्रसव राजकीय अस्पतालों में नहीं कराया है। जबकि ये आशाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है कि वह प्रसूताओं को समय से इलाज दिलवाकर इनका सरकारी अस्पताल में प्रसव कराएं।
इसके बाद सीएमओ डॉ. सुरेश कुमार ने इन्हें अंतिम चेतावनी दी है। इसके जरिये कहा कि अगर काम में तत्काल सुधार नहीं किया जाता है तो सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। इसमें सबसे अधिक 22 आशाएं रेउसा विकासखंड की हैं। इसके अलावा एलिया, गोंदलामऊ, महमूदाबाद, खैराबाद, कसमंडा, मछरेहटा व सकरन की आशाएं भी शामिल हैं।
प्राइवेट में कराती हैं प्रसव
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार आशाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर बहुत ही कम प्रोत्साहन धनराशि मिलती है। ऐसे में ये आशाएं आसपड़ोस के निजी अस्पताल में गठजोड़ कर लेती हैं। वहां पर प्रसव कराने पर इन्हें अच्छी खासी धनराशि मिल जाती है। साथ ही अस्पताल की तरफ से उपहार भी दिए जाते हैं। एक प्रसव पर इन्हें कम से कम दो से तीन हजार रुपये मिल जाते हैं। इसी वजह से यह सरकारी अस्पताल में सुविधाएं न होने की बात कहकर प्राइवेट में मरीजों को लेकर जाती हैं। इसी वजह से इनके प्रसव सरकारी अस्पताल में शून्य हो रहे हैं।