सीतापुर। पिछले बरस सुहागिनों को विधवा पेंशन देने का मामला सुर्खियों के आने बाद अब समाज कल्याण विभाग वृद्धावस्था पेंशन घोटाले से दागदार हुआ है। अफसर-कर्मचारियों व दलालों के गठजोड़ ने बुजुर्गों के हक पर डाका डालते हुए 17 करोड़ 21 लाख 62 हजार 430 रुपये हजम कर लिए।
विशेष अनुसंधान शाखा सहकारिता, अपराध अनुसंधान विभाग की जांच में इस भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। ये रिपोर्ट नौ बरस बाद आई है। जांच में 34 अफसर-कर्मी व दलालों को दोषी पाया गया है। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी व मिनी बैंक के प्रबंधक भी अभियुक्त बनाए गए हैं। इनके विरुद्ध कोर्ट में दो आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं।
जिले में वित्तीय वर्ष 2009-10 में वृद्धावस्था पेंशन में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में दो एफआईआर दर्ज हुई थीं। एक एफआईआर सीतापुर कोतवाली में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी वाईके राय ने दर्ज कराई थी। जबकि दूसरी एफआईआर लहरपुर कोतवाली में तत्कालीन बीडीओ लहरपुर शिवकुमार पांडेय ने दर्ज कराई थी।
मुकदमों की विवेचना के दौरान कुछ आरोपियों को जेल भी भेजा गया था। इसके बाद शासन के आदेश पर दिसंबर 2009 में जांच विशेष अनुसंधान शाखा सहकारिता, अपराध अनुसंधान विभाग लखनऊ को सौंप दी गई। अनुसंधान शाखा की टीम ने जिले में जुलाई 2018 से जनवरी 2019 तक गहन जांच की।
संबंधित लोगों के बयान लेने के साथ ही जरूरी अभिलेख अपनी अभिरक्षा में ले लिए गए। इसके बाद करोड़ों रुपये के वृद्धावस्था पेंशन घोटाले में दो आरोपपत्र एसीजेएम द्वितीय की कोर्ट में दाखिल किए गए हैं।
पहले आरोपपत्र में 32 लोगों को षड्यंत्र करके महत्वपूर्ण अभिलेख गायब कर साक्ष्यों को नष्ट करते हुए 16 करोड़ 34 लाख 14 हजार 430 रुपये की सरकारी धनराशि का गबन करने का प्रथमदृष्ट्या दोषी पाया गया है।
इसके फलस्वरूप संबंधित अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 409, 406, 419, 420, 467, 468, 471, 201, 204, 218, 120-बी भादिवि के तहत आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया गया है।
वहीं, तत्कालीन बीडीओ लहरपुर की ओर से दायर एफआईआर में अभिलेखीय एवं मौखिक साक्ष्यों से कुल 87 लाख 48 हजार रुपये का गबन होना प्रथमदृष्ट्या पाया गया।
इसके फलस्वरूप चार लोगों के विरुद्ध धारा 409, 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी भादिवि के तहत आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया गया है। ऐसे में दोनों आरोपपत्रों में 17 करोड़ 21 लाख 62 हजार 430 रुपये का गबन पाया गया है।
तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी वाईके राय, ओमप्रकाश शर्मा तत्कालीन सचिव/शाखा प्रबंधक मिनी बैंक निबौरी थाना लहपुर को दोनों आरोपपत्रों में अभियुक्त बनाया गया है।
इसी प्रकार पंकज दीक्षित, महेश प्रसाद, अयूब सिद्दीकी तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक, तमिल अहमद ग्राम विकास अधिकारी, सुरेंद्र कुमार जौहरी एडीओ समाज कल्याण, संजय तिवारी सहायक अध्यापक, संत प्रकाश ग्राम विकास अधिकारी, सुनील कुमार ग्राम विकास अधिकारी, पवन दीक्षित कंप्यूटर ऑपरेटर व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामखेलावन का नाम आरोपपत्र में है।
साथ ही सुधीर दीक्षित, सत्तार अहमद, लुकमान, यूनुस, शिवशंकर, पप्पू, हरिहर, गोपाल, टन्नी, जगन्नाथ, चुन्नीलाल, लालजी उर्फ लाला, महताब उर्फ चौघड़ा, दलाल लालजी, महेंद्र सिंह, भूधर, स्वामीदयाल, शिवसागर यादव, कृष्णकुमार, हरिनाम, सुरेंद्र, हरनाम लाल वर्मा निवासी महमूदपुर गेरुहा ब्लॉक लरहपर (वर्तमान प्रधान) एवं सुनील कुमार के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
जिले में वित्तीय बर्ष 2009-10 में वृद्धावस्था पेंशन में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में दो एफआईआर दर्ज हुई थीं। जिसकी प्रारंभिक विवेचना स्थानीय पुलिस द्वारा की गई।
इसके बाद अभियोग की विवेचना शासन के आदेश पर 22 दिसंबर 2009 को विशेष अनुसंधान शाखा सहकारिता, अपराध अनुसंधान विभाग लखनऊ को दी गई। इसके बाद वर्ष 2012 में ये मामला विधानसभा की आश्वासन समिति में पहुंचा। इसकी संख्या-320/2012 है।
करोड़ों रुपये के वृद्धावस्था पेंशन घोटाले में दाखिल किए गए दोनों आरोपपत्रों की जानकारी अनुसंधान शाखा सहकारिता के प्रभारी एसपी सुरेंद्र नाथ यादव ने विशेष सचिव समाज कल्याण को दी है। कार्रवाई के लिए निदेशक समाज कल्याण व डीएम को भी रिपोर्ट भेजी है।