सीतापुर। सरयू नदी का जलस्तर 10 सेमी बढ़कर सोमवार को 118.20 मीटर पर पहुंच गया। पानी अब खतरे के निशान से महज 80 सेंटीमीटर नीचे है। बाढ़ से करीब 115 बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। बहाव तटवर्ती गांवों की ओर तेज हो गया है। प्यारेपुरवा में घरों के आसपास पानी भर रहा है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। उधर, बैराजों से 3.01 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी जिले में पहुंचने से हालात बिगड़ सकते हैं।
इस बार सरयू नदी का मिजाज समझ से परे है। नदी के पानी में पिछले एक पखवाड़े से उतार-चढ़ाव जारी है। पानी घटने से तराई क्षेत्र के ग्रामीणों को राहत की उम्मीद नजर आती है, तो कुछ दिन बाद जलस्तर फिर बढ़ने लगता है।
रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार पिछले दो दिन से सरयू का जलस्तर स्थिर था। इसी बीच सोमवार को जलस्तर में 10 सेंटीमीटर इजाफा हो गया। पानी नदी के दायरे से बाहर निकलने लगा है। बाढ़ के पानी से करीब 115 बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं।
किसानों ने बताया कि उनकी फसलें पानी में डूब चुकी हैं। यदि एक-दो दिन के भीतर पानी नहीं उतरा तो धान सहित अन्य फसलें सड़ सकती हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। सोतीपुरवा, जगरूपपुरवा, कनरखी, बक्शीपुरवा, फतेपुरवा, मिश्रणपुरवा, नागेश्वर पुरवा, अखरी, बाबाकुटी, निरंजन पुरवा व धांधी समेत करीब 20 गांवों के किनारे तक बाढ़ का पानी धीरे-धीरे पहुंच रहा है। प्यारेपुरवा में फूलचंद्र व गजराज आदि के घरों के चारों तरफ पानी भरना शुरू हो गया है।
रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार सरयू व शारदा नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती खेत बाढ़ की चपेट में आने लगे हैं। धीमी गति से लहरें कटान भी कर रही हैं। राजू गैस एजेंसी व त्यागी महराज कुटी से सिर्फ 200 मीटर दूर लहरें हिलोरें मार रही हैं।
बिसवां तहसीलदार अनिल कुमार राम ने बताया कि अभी बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है। एहतियात बरती जा रही है।